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बीकाणा अब बदल चला हैैं

मेरा बीकाणा अब बदल चला है
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कुछ अजीब सा माहौल हो चला है,
मेरा शहर अब बदल चला है….

ढूंढता हूँ उन परिंदों को, जो बैठते थे कभी घरों के छज्ज़ो पर
शोर शराबे से आशियाना
अब उनका उजड़ चला है,
मेरा बीकाणा  अब बदल चला है…..

होती थी सायकलों की सवारी
मंज़िल तो वही है
मुसाफिर अब बाइक्स व कारों में चढ़ चला है
मेरा बीकाणा अब बदल चला है…

बोर , खोखा, ककड़ी, इमली
खाते थे कभी हम
स्कूल कॉलेजो के प्रांगण में,
अब तो बस बेक समोसा, पेस्ट्री और क्रीम रोल का दौर चला है
मेरा बीकाणा अब बदल चला है

शहर के  पाटों  पर बतियाते थे दोस्त  के साथ घंटों तक
अब तो बस शादी, पार्टी या
उठावने पर मिलने का ही दौर चला है
मेरा  बीकाणा अब बदल चला है….

वो टेलीफोन का काला चोगा उठाकर खैर-ख़बर पूछते थे,
अब तो स्मार्टफोन से फेसबुक, व्हाटसऐप और ट्वीटर का रोग चला है
मेरा बीकाणा अब बदल चला है…..

कोटगेट, टेकरी,  , धोरों में भुजियों  का ज़ायका रंग जमाता था
अब तो सेन्डविच, बेक समोसा, पेस्ट्री और क्रीम रोल की ओर चला है
मेरा बीकाणा अब बदल चला है….

वो साइकिल पर बैठकर, दूर की डबल सवारी,
कभी होती उसकी, कभी हमारी बारी,
अब तो बस फर्राटेदार बाइक का फैशन चला है
मेरा बीकाणा  अब बदल चला है….

जाते थे कभी ट्यूशन पढ़ने माड़ साब के वहाँ,
बैठ जाते थे फटी दरी पर भी पाँव पसार कर ,
अब तो बस कोचिंग क्लासेस का धंधा चल पड़ा है,
मेरा बीकाणा अब बदल चला है…..

खो-खो, सितोलिया, क्रिकेट, गुल्लिडंडा, डिब्बा-डाउन खेलते थे गलियों और मोहल्लों में कभी,
अब तो न वो गलियाँ रही, न मोहल्ले न वो खेल, सिर्फ और सिर्फ कम्प्यूटर गेम्स का दौर चला है,
मेरा बीकाणा अब बदल चला हैं…..

रेडियो में अल-सुबह तक चलते क्लासिकल गाने-बजाने के सिलसिले
अब तो एफएम और डीजे का वायरल चल पड़ा है,
मेरा बीकाणा अब बदल चला है….

गर्ल्स काॅलेज की लड़कियों से बात करना तो दूर नज़रें मिलाना भी मुश्किल था
अब तो बेझिझक हाय ड्यूड,
हाय बेब्स का रिवाज़ चल पड़ा है
मेरा बीकाणा अब बदल चला है….

घर में तीन भाइयों में होती थी एकाध साइकिल पिताजी के पास स्कूटर,
अब तो हर घर में कारों और बाइक्स का काफ़िला चल पड़ा है
मेरा बीकाणा अब बदल चला है….

खाते थे समोसे, कचोरी, जलेबी, गूंदपाक, गरमा-गरम  पर,
अब वहाँ भी चाउमिन, नुडल्स,
मन्चूरियन का स्वाद चला हैं
मेरा बीकाणा अब बदल चला है….

कोई बात नहीं;
सब बदले लेकिन मेरे शहर के
खुश्बू में रिश्तों की गर्मजोशी बरकरार रहे
आओ सहेज लें यादों को
वक़्त रेत की तरह सरक रहा है…
मेरा बीकाणा अब बदल चला हैैं…

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Wo Barsat ki sham, Wo K.E.M.

Wo Barsat ki sham,
Wo K.E.M. road ka jam.
Wo pawanpuri Ki hawa,
Wo PBM hospital ki dawa.
Wo heralal ki shopping,
Wo mobile ki talking.
Wo Bade Bazar ki kachori,
Aur paneer ki pakori
Wo Ganesh hotel ka khana,
jiska sara jahan h diwana.
Wo LAL ji ki pav bhaji ka Anand,
Wo Rajasthan pan bhandar k paan ka Gulkand
WO J.N.V. ki sadke,
Jaha kitne dil dhadke.
Wo pyar ki batein,
Aise hai Kuch BIKANER ki Yaadein..Read Details

Moda base Medateye, Dhanwala Jaiselmer, kuda base

Moda base Medateye,
Dhanwala Jaiselmer,

kuda base Japuria Aur
kubhudhi BikanerRead Details

Chikanguniya Chikanguniya konkar faile mosu suniya ime

Chikanguniya Chikanguniya
konkar faile mosu suniya

ime ek tarah re machhar kaate
kitanoo jaave khoon re saage

sarir mai pela tez bukhar aave
pachche maatho faate
or ghum jaave haddiyon ra sagala ghuniya
chikanguniya chikanguniya

ime dawai kom nahi aave, 
khali disprin su kaam chalave

raat ne patient dard su isso adaave
ki utha khane sagala suvaniya
chikanguniya chikanguniya ...

poet - Dr. Dau Lal HarshRead Details

Wo barsat ki saam Wo mohta

Wo barsat ki saam
Wo mohta chowk ka jam
Wo sansolav ki hawa
Wo pbm ki dava
Wo labhuji katle ki shopping
Wo mobile ki talking
Wo chai patti ki kachori
Wo b k school ki pakori
Wo bhaya dhaba ka khana
Jiska sara sahar hai diwana
Wo lalji ki paav bhaji ka anand
Wo mulsa fulsa ke paan ka gulkand
Wo nathusar ki sadke 
Janha kitne dil hai dhadke
Wo pyri si rate
Asi hi kuch hai bikaner ki yaadainRead Details