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अब सौंप दिया इस जीवन

अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में ।। टेर ।।

1.है जीत तुम्हारे हाथों में और हार तुम्हारे हाथों में ।।
मेरा निश्चय बस एक यही, इक बार तुम्हें पा जाऊँ मैं ।
अर्पण कर दूँ दुनिया भर का, सब प्यार तुम्हारे हाथों में ।। 

अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में ।। टेर ।।

2.जो जग में रहूँ तो ऐसे रहूँ, ज्यों जल में कमल का फूल रहे ।
मेरे सब गुण दोष समर्पित हो, करतार तुम्हारे हाथों में ।। 

अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में ।। टेर ।।


3.यदि मानव का मुझे जन्म मिले, तो तव चरणों का पुजारी बनूँ
इस पूजक की इक इक रग का हो, तार तुम्हारे हाथों में ।। 

अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में ।। टेर ।।

4.जब जब संसार का कैदी बनूँ, निष्काम भाव से कर्म करूँ ।
फिर अन्त समय में प्राण तजूँ, सरकार तुम्हारे हाथों में ।। 

अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में ।। टेर ।।


5.मुझ में तुझ में बस भेद यही, मैं नर हूँ तुम नारायण हो ।
मैं हूँ संसार के हाथों में संसार तुम्हारे हाथों में ।। 
अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में ।। टेर ।।Read Details

Soni, New Delhi कान्हा तुम काहे

Soni, New Delhi

कान्हा तुम काहे हमें सता रहे हो, 
क्यों बेकरार दिलों को तड़पा रहे हो, 
यूं छेड़ो ना बांसुरी की तान, 
पड़ते ही कानों में ये ले लेती है हमारी जान। 

तुम तो मथुरा के बन बैठे हो मेहमान, 
यहां इंतजार में सूख रहे हैं हमारे प्राण, 
बहुत बेदर्दी है तुम्हारी बांसुरिया, 
तुम कोसों दूर से इसे बजाते, 
पर लगता है कदम-भर दूर हो 
ऐसे क्यों हो हमें सताते? 

हम घंटों पेड़ के तले बैठे रहें उपवन में, 
निहारते रहे बंद नैंनों से बासी तस्वीर मन में, 
तुम वहां खा रहे हो मनभर मक्खन, 
यहां गउओं ने बांध लिए हैं अपने थन, 
जल्द आके बांसुरी की मीठी तान दो, 
क्योंकि सूख रही है मक्खन की गगरी, 
बेबस हो रही है दूध बिन वृंदावन सगरी, 

तुम्हारी लीलाओं से कोई नहीं अनजान है, 
तभी तो बिन तुम्हारे सबकुछ लगता बेजान है, 
आ जाओ, अब यूं छेड़ो ना बांसुरी की तान, 
पड़ते ही कानों में ये ले लेती है हमारी जान।Read Details

A PINK BLUE FOR RADHIKA!

A PINK BLUE FOR RADHIKA! 

It was a blue rose, rare and beautiful, 
Splendid lavor of Nature, 
That one day appeared, mysterious, 
A red jarrão of arch-duchess. 

Deparando the arch-Duke, Sri Krsna, the graceful flower, 
Smiled a thought. . . In with lightness. 
The late afternoon, then a beautiful rose, 
Perfumava the aposento the marquesa. 

And when the moon - the protective eternal -- 
Redoirava the palace of this story, 
Tremia on real hands of Sri Sri Radha Krsna, the beautiful flower 
That once in the morning, in a tavern, 
Fenecia, smiling, full of glory, 
In bandurra kind of a devout trovador.Read Details