" DARD " Sabhi Insaano Mein

" DARD "

Sabhi Insaano Mein Hai Magar...
Koi Dikhata Hai To... Koi Chhupata Hai...


. " HUMSAFAR "

Sabhi Hai... Magar...
Koi Saath Deta Hai... To...
Koi Chhod Deta Hai...



" PYAR "

Sabhi Karte Hai...Magar...
Koi Dil Se Karta Hai... To...
Koi Dimag Se Karta Hai...



" DOSTI "

Sabhi Karte Hai... Magar...
Kuch Log Nibhate Hai... aur
Kuch Log Aazmate Hai...

. " RISHTA "

Kai Logon Se Hota Hai... Magar...
Koi Pyar Se Nibhata Hai.. To...
Koi Nafrat Se Nibhata Hai



" EHSAAS "

Sabko Hota Hai... Magar...
Koi Mehsoos Karta Hai... To...
Koi Samajh Nahi Paata...


" ZINDAGI "

Sabhi Jeete Hai... Magar...
Koi Sab Kuch Paane K Baad Bhi Dukhi Rehte Hai... To...
Koi Lutake Khush Rehte HaiRead Details

Ek masum sa chehra, 2 jheel

Ek masum sa chehra,
2 jheel si ankhe,
Kuchh mithi mithi baate,
Ek nazuk ada,
Kuchh masti kuchh maza,
Thodi si shrarat,
Bahut sari mohabbat,
Ek bholi si muskan,
Ooncha udne ka armaan,
Sabse alag sabse juda,
Jiski hai pyari har ek ada.......
wo Sweet Girl ho $TUM$
I Think.............
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.....,'.................(
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......``---.......__)
..............) |) |
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Sweet raho CADBURY ki Tarah;
Fresh raho CLOSEUP ki tarah;
BEAUTIFUL raho Fair&Lovely ki tarah;
Tension free raho CHILD ki tarah;
aur smart raho MERI TARAH ..Read Details

क्या लिखूँ : कुछ जीत

क्या लिखूँ : कुछ जीत लिखू या हार लिखूँ

या दिल का सारा प्यार लिखूँ ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰

कुछ अपनो के ज़ाज़बात लिखू या सापनो की सौगात लिखूँ ॰॰॰॰॰॰

मै खिलता सुरज आज लिखू या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँ ॰॰॰॰॰॰

वो डूबते सुरज को देखूँ या उगते फूल की सान्स लिखूँ

वो पल मे बीते साल लिखू या सादियो लम्बी रात लिखूँ

मै तुमको अपने पास लिखू या दूरी का ऐहसास लिखूँ

मै अन्धे के दिन मै झाँकू या आँन्खो की मै रात लिखूँ

मीरा की पायल को सुन लुँ या गौतम की मुस्कान लिखूँ

बचपन मे बच्चौ से खेलूँ या जीवन की ढलती शाम लिखूँ

सागर सा गहरा हो जाॐ या अम्बर का विस्तार लिखूँ

वो पहली -पाहली प्यास लिखूँ या निश्छल पहला प्यार लिखूँ

सावन कि बारिश मेँ भीगूँ या आन्खो की मै बरसात लिखूँ

गीता का अॅजुन हो जाॐ या लकां रावन राम लिखूँ॰॰॰॰॰

मै हिन्दू मुस्लिम हो जाॐ या बेबस ईन्सान लिखूँ॰॰॰॰॰

मै ऎक ही मजहब को जी लुँ ॰॰॰या मजहब की आन्खे चार लिखूँ॰॰॰

कुछ जीत लिखू या हार लिखूँ , या दिल का सारा प्यार लिखूँ.......Read Details

UNHE KISSA-E-GAM SUNATE SUNATE KATI RAATEIN

UNHE KISSA-E-GAM SUNATE SUNATE
KATI RAATEIN AANSU BAHATE BAHATE

KAHI BUJH NA JAYE CHIRAAG-E-TAMANNA
CHIRAAG-E-MOHABBAT JALAATE JALAATE

KISSI KO KHABAR HI NAHI LUT GAYAA HU
MOHABBAT KI DUNIYA BASATE BASAATE

KEHDE KOI UNSE.....
WO KHUD BAAZ AAYE APNE SITAM SE
HUM THAK GAYE HAIN MANATE MANATE.
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ahal-e-daval main dhoom thi roz-e-saeed

ahal-e-daval main dhoom thi roz-e-saeed ki
muflis ky dil main thi na kiran bhi ummid ki
itny main aur charkh(Sky) ny matti palid ki
bachchy ny muskura ke khabar di jo eid ki
fart-e-mihan se nabz ki raftar ruk gai
MAA-BAAP ki nigah uthi aur jhuk gai
ankhain jhukin ki dast-e-tihi par nazar gai
bachchy ky val-valon ki dilon tak khabar gai
zulf-e-sabat ghum ki hawa sy bikhar gai
barchhi si ek dil se jigar tak utar gai
donon hujuum-e-gam se ham-agosh ho gaye
ik duusare ko dekh ke khamosh ho gaye



dast-e-tihi = empty hands;
val-vale = enthusiasm
sabat = patience;
barchhi = spear
fart-e-mihan = wave of sorrow;
nabz = pulse
ahal-e-daval = rich people;
roz-e-saeed = festive day
muflis = poor/poverty/stricken;
charkh = sky (referring to god)
hujuum = crowd;
ham-agosh = embracedRead Details

Benaam Sa Ye Dard,Thehar Q

Benaam Sa Ye Dard,Thehar Q Nahi Jata!
Jo Beet Gaya Hai,Woh Guzar Kyon Nahi Jata!!

Sab Kuch To Hai,Kya Dhundti Rehti Hai Nigaahein!
Kya Baat Hai,Mai Waqt Pe Ghar Kyon Nahi Jata!!

Woh Ek Hi Chehra To,Nahi Sare Jahan Mein!
Jo Door Hai Woh, Dil Se Utar Kyon Nahi Jata!!

Main Apni Hi Uljhi Hoi,Raho Ka Tamasha!
Jate Hain Jidhar Sab,Main Udhar Kyon Nahi Jata!!

Woh Naam Jo Na Jane Kab Se, Na Chehra Na Badan Hai!
Woh Khawaab Agar Hai,To Bikhar Kyo Nahi Jata!!Read Details

Logo ke saath khud ko

Logo ke saath khud ko badalte dekha hai.,
Humne har shaqs ko rote hue dekha hai.!
Jeete khud nahi,jeene dete bhi nahi.,
Har ek ko humne marte hue dekha hai.!Read Details

Tu ne yeh mashvara suna

Tu ne yeh mashvara suna hai kya ?
Zindagi ishq ke siwaa hai kya !

Kaatali sab sazayen ab to bataa,
E sitamagar, mera gunah hai kyaa ? 

Aah mehfil main naa nikalane di ,
Chhup ke rona bhi kuchh gunah hai kyaa?

Umr bhar na mila hai mujhako sukun ,
Maut hi aakhiri panah hai kyaa ?

Ai mere jurm ginaane wale
Tere ghar koi aaina hai kya ? 

Chaand itna udaas dhundhala tu ,
Mujhase ziyada, tanhaa hai kyaa?

Ajanabi se woh aaj baithe hain ,
Qatl ka yeh hi din chuna hai kyaa ?Read Details

Meri Ankhon Ko Koi Khwab To

Meri Ankhon Ko
Koi Khwab To Do

Mujhe Is Bat Ka
Koi Hisab To Do

Sabhi Mehfil Me
Hay Tanha Tanha

Mujhe Is Bat Ka
Koi Jwab To Do

Teray Gham Ko 
Bhula Sku Jis Sey

Mujhe Aisi Koi
Sharab To Do

Kya Hasil Hey
K Meri Mayat Ko

Tum Chadar Koi
Ghulab Ki To DoRead Details

A precious little Angel Sitting in

A precious little Angel
Sitting in her shining gown
She looks into your eyes
Quietly without a sound

There's a wonderful peace
That's lingering everywhere
It's a comfort to your soul
As you feel it in the air

This precious little Angel
Will stay by your side
Watching over your steps
Catching the tears you've criedRead Details

Us ney kaha mujh sey

Us ney kaha mujh sey kitna pyAar hai...

Main ney kaha sitaron ka koi shumar nahin

Us ney kaha k kon tumhin hai bohat aziz ?

MAin ney kaha, dil pey jis ka ikhtiyar hai

Us ney kaha Kon sa Tofah tumhin main doon

MAin ne kaha wohi shaam jo abhi tak udhar hai

Us ney kaha Khizan main mulaqat ka jawaz...

Main ney kaha, qurb ka matlab bahar hai......

Us ney kaha senkron gham zindagi main hain

Main ney kaha gham nahin, jab ghamgasar saath hai

Us ney kaha saath kahan tak nibhaon gi...???

Main ney kaha jitni yeh saans ki taar hai......

Us ney kaha mujh ko yaqeen aaye kiss tarah

Main ney kaha, naam mera aetbaar hai....!!!Read Details

A gazal on life journey

पता ढूंढता हूँ उजालों के घर का ।
मुसाफिर हूँ मै कोई तनहा सफ़र का ।

भले ही फिरूँ बेखबर होके खुद से,
दिवाना हूँ लेकिन तुम्हारी खबर का ।

है रंजो गमों की ये जायजाद मेरी,
शहंशाह हूँ अपने दिल के नगर का ।

हवाओं के रुख से बता दे ये कोई,
हमे इल्म है आंधियों की गुज़र का ।

कि है नूर उसका ही खुशबू उसी की,
मै इक फूल हूँ उसके दिल के शज़र का ।

ग़ज़ल ये अगर कोई समझे,
असर उसपे आ जाए मेरे असर का...Read Details

ऐसा ही होता है

होता है.... होता है.... 

ऐसा भी होता है 
रोने को कंधा देने वाला 
अक्सर अकेले में रोता है
ओरों को हंसी देने वाला, 
सर तकिये पर रख सोता है, 
नींद से पहले अक्सर, 
तकिया गीला होता है।

होता है... होता है....
जिन्दगी के खेल में, 
हारने वाले की बात क्या, 
जीतने वाला अक्सर, 
जीत कर रोता है।
होता है.... होता है...

बचपन से बङा बनना, 
हर किसीका सपना होता है, 
जवानी का अभिमान, 
बुढापे में रोता है।
होता है... होता है...

मर्म जानलो रोने का, 
जिसके सीने में 
दिल होता है 
केवल वोही रोता है।
होता है..... होता है 

ऐसा ही होता है।Read Details

मैं लोगों से .. मुलाक़ातों

मैं लोगों से .. मुलाक़ातों .. के लम्हे याद.. 
रखता हूँ...
मैं बातें .. भूल भी जाऊं .. तो लहज़े याद..  
रखता हूँ ;

सर-ए-महफ़िल निगाहें.. मुझ पे .. 
जिन लोगों की पड़ती हैं ...
निगाहों के .. हवाले से .. वो चेहरे याद.. 
रखता हूँ ;

ज़रा सा हट के.. चलता हूँ ..
 ज़माने की रिवायत से...
के जिन पे बोझ.. मैं डालूँ ..वो कंधे याद.. 
रखता हूँ ;

दोस्ती जिस से की .. उस से .. 
निभाउंगा जी जाँ से...
के मैं दोस्ती के.. हवाले से .. रिश्ते याद..
रखता हूं ;

मैं यूँ तो भूल.. जाता हूँ .. खराशें.. तल्ख़
बातों की ...
मग़र जो ज़ख्म.. गहरे दें वो .. रवैय्ये याद..
रखता हूँ..."Read Details

बात कम कीजे जहानत को

बात कम कीजे जहानत को छिपाते रहिये 
अजनबी शहर है ये , दोस्त बनाते रहिये 

दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता 
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिये 

ये तो चेहरे की शबाहत हुई तस्वीर नहीं 
इस पे कुछ रंग अभी और चढाते रहिये 

गम है आवारा अकेले में भटक जाता है 
जिस जगह रहिये वहाँ मिलते मिलाते रहिये 

कोई आवाज तो जंगल में दिखाए रस्ता
अपने घर के दरो दीवार सजाते रहिये ----------- निदा फाजली 

जहानत -- प्रतिभा , शबाहत --सदृशता , दरो दीवार ---- दरवाजा और दीवारRead Details

मन की अभिलाषा क्रंदन करती

मन की अभिलाषा क्रंदन करती 
निज मन को ही दुःख से भारती
उजली होती काश ये धरती
कोई तो मन को समझाए

चलो आशा दीप जलाएं !!


तम हटता होता है सबेरा
हर्षित होता है मन मेरा
एक दिया लाखो अँधेरा
पल में अंधियारे को भगाए

चलो आशा दीप जलाएं !!!


मंद करुण तल यूँ जल जल के
नीर नेत्र से क्षण क्षण छलके
मन का प्रेम मन में छुपाये

चलो आशा दीप जलाएं !!!


कुछ मन में उनके कुछ था मेरे
अनजाने से क्यों बादल घेरे
क्यों हम न उनके वो न मेरे
खुद से पूछे खुद को ही बताएं

चलो आशा दीप जलायें !!!

----सुजीत सिंह (sujeetsingh333@gmail.com) Read Details

जिन्दा रहना है तो, हर

जिन्दा रहना है तो, हर साँस दुश्मन से न मांग !
रखवाला खुदा है, तो रहमत महालात से न मांग !
ज़िन्दगी अगर भीख है, तो न मिलना बेहतर !
और अगर हक़ है, तो इतनी सराफत से न मांग !!!
---सुजीत सिंह Read Details

झूठ तो झूठ है अकेलापन अकेलापन

झूठ तो झूठ है अकेलापन
अकेलापन सुखद अहसास है
इससे कोफ्त नहीं होती
यह तो लोगों को
परखने का साधन है
मन को, अनुभवों को
विस्तार मिलता है
अकेलापन खुद को खुद से
सिखाता है प्यार करना
भीड़ में खड़ा व्यक्ति
भले ही भ्रम में रहे
पर सच यह है कि वह
खुद में भी अकेला है
कोई किसी के पास होने का
दम नहीं भर सकता
परछाइंर् तक साथ नहीं देती
अमावस की मानिंद
अंधेरे में खो जाती है
अकेलापन!
कई भ्रमों को तोड़ता है
खुद को खुद से जोड़ता है...

(Nature)प्रेम ही शिवम है''Read Details

आँखों से देखा दिल में

आँखों से देखा दिल में उत्तर कर नहीं देखा
कश्ती में मुसाफिर ने समुंदर नहीं देखा 
पत्थर समझा मुझे मेरे चाहने वालो ने 
में मोम हु किशी ने मुझे छूकर नहीं देखाRead Details

गर रख सको तो एक

गर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं ,
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया,
वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं.....
सबको प्यार देने की आदत है हमें,
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे,
कितना भी गहरा जख्म दे कोई,
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें...
इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं,
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं,
जो समझ न सके मुझे, उनके लिए "कौन"
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं,
आँख से देखोगे तो खुश पाओगे,
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं,,,,,
"अगर रख सको तो निशानी, खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं"....
Read Details

कभी उसे भी मेरी याद

कभी उसे भी मेरी याद सताती होगी, 
अपनी आँखों में मेरे खवाब सजाती होगी,

वो जो हर वक़्त ख्यालों में बसी रहती है,
कभी तो मेरी भी सोचो में खो जाती होगी,

वो जिसकी राह में पलकें बिछी रहती है,
कभी मुझे भी अपने पास बुलाती होगी,

लबों पर रहती है वो हर पल हंसी बनकर,
तसवर से मेरे वो भी मुस्कुराती होगी,

वो जो शामिल है मेरे गीत मेरे नागमो में,
कभी तन्हाई में मुझको गुण गुनाती होगी,

जिसके लिए मेरा दिल बेकरार रहता है,
मेरे लिए अपना चैन भी गवंती होगी,

जिससे प्यार हर पल करना चाहूँ,
कभी इकरार तो वो भी करना चाहती होगी,

जिसके लिए मेरी हर रात है कटती करवट करवट,
कभी तो उसे भी नींद ना आती होगी,
जिसकी उल्फत की शमा से है मेरा दिल रोशन,

मेरी चाहत के वो भी दीप जलती होगी,
छोड़ कर चला जाऊंगा उसे एक दिन, 

मेरी जुदाई उसे भी युही रुलाती होगी..
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भटक रही हूँ मैं सहारे

भटक रही हूँ मैं सहारे की तलाश में .......
नदी सी बह रही हूँ, किनारे की आस में........
खो रही हूँ अँधेरे में..........
रौशनी की तलाश में.......
खुद में ही उलझी हुई हूँ.
....... खुद की तलाश में............
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युँ तो बहुत कुछ है

युँ तो बहुत कुछ है पास मेरे फिर भी कुछ कमी सी है
घिंरा हूँ चारो तरफ़ मुस्कुराते चेहरो से
फिर भी जिन्दगी में उजाले भरने वाली उस मुस्कुराहट की कमी सी है
दिख रही है पहचान अपनी ओर उठते हर नज़र में
फिर भी दिल को छु लेने वालि उस निगाह की कमी सी है
गुँज़ता है हर दिन नये किस्सो, कोलाहल और ठहाको से
फिर भी कानो में गुनगुनाति उस खामोशी कि कमी सी है
बढ़ रहे है कदम मेरे पाने को नयी मन्ज़िलें
फिर भी इन हाथो से छुट चुके उन नरम हाथो की कमी सी है.
"हमेशा हँसते रहो, हँसना ज़िन्दगी की जरूरत है,
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अगर रख सको तो एक

अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं,
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया,
वो एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं,
सबको प्यार देने की आदत है हमें,
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे,
कितना भी गहरा जख्म दे कोई,
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें,
इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं,
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं,
जो समझ न सके मुझे उनके लिए "कौन",
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं,
आँख से देखोगे तो खुश पाओगे,
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं,
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नारी नारी कितनी महान हो तुम मुखडे

नारी


नारी कितनी महान हो तुम
मुखडे की मुसकान हो तुम
बादल की परतों में चंदा
नारी जगत की शान हो तुम
उजडे बाग-बगीचों में तुम
धडकन की महारानी हो तुम
अपार सागर महा समुन्दर
शक्ति की पटरानी हो तुम
हुमायूँ को राखी-डोरा भेजा
भाई-बहन की शान हो तुम
नाविक हो नारी भी हो तुम 
सागर का बेडा पार करो तुम
रूण्ड-मुण्ड की माला पहिने
चन्डी हो रणचण्डी हो तुम 
स्रष्टा हो रुष्टा भी हो तुम 
अन्नपूर्णा महारानी हो तुम
ताण्डव नृत्य कियो शिवजी ने
सृष्टि की महारानी हो तुम
शरद ऋतु में रास रचायो
शामा हो पटरानी हो तुम 
शमा बनी शबनम की मीरा
कुदरत की महारानी हो तुम
नारी कितनी महान हो तुम

(डॉ. नर्वदाशंकर रणा)
महालक्ष्मी चौक, बाँसवाडा, राजस्थानRead Details

काया कोई काम न आवेगी काया मद

काया


कोई काम न आवेगी काया
मद में उसको जान न पावे
विधि लेख मिटे नहीं माया में
जीवन की घडयां बित जावें
कोई काम न आवेगी काया
पंछी उडता चलती काया में
मैं का भान नहीं आवे
यह सागर अंत नहीं उसका
मुनिराज भी पार नहीं पावे
कोई काम नहीं आवेगी काया
चलता-फिरता मैं भूल जाऊँ
मन काम में मेरा लग जावे
रोना-पिटना पिंजरा खाली
जब शेर यहां से भग जावे
कोई काम न आवेगी काया
सुनते रहने की रीत यहां पर
ध्यान नहीं जो सो जावें
सोने वालों की बात नहीं
जगने वाले कुछ पा जावें
कोई काम न आवेगी काया


(डॉ. नर्वदाशंकर रणा)
महालक्ष्मी चौक, बाँसवाडा, राजस्थानRead Details

जाऊँ तो जाऊँ कहाँ.... जाऊँ तो

जाऊँ तो जाऊँ कहाँ....


जाऊँ तो जाऊँ कहाँ
दिल के अरमान लिये
जली ये आग सनम और सितम की शान लिये
जाऊँ तो जाऊँ कहाँ.....।

बना महमान भला, भली तकदीर मेरी
पडा हूँ देख रहा आग पे तसवीर तेरी
जुदाई हो गई सपनों में अहसान लिये
जाऊँ तो जाऊँ कहाँ......।

बँधा हूँ इस कदर कि हाथ में कडयां भी नहीं
मिली जो खाक में माटी की लडयां भी नहीं
नजर में था भी नहीं मौत का पैगाम लिये
जली ये आग सनम की सितम की शान लिये
जाऊँ तो जाऊँ कहाँ........।

- डॉ. नर्मदाशंकर रणाRead Details

यह साए हैं , दुनिया

यह साए हैं , दुनिया की परछाइयों की 
भरी भीड़ में , खाली तनहाइयों की 

यहाँ कोई साहिल - सहारा नहीं है 
कहीं डूबने को किनारा नहीं है 

कई चाँद उठ कर जलाए - बुझाये 
बहुत हमने चाहा ज़रा नींद आये 

यहाँ सारे चेहरे हैं मांगे - हुए - से 
निगाहूँ में आंसू भी टाँगे - हुए से 

बड़ी नीची राहें हैं उचाइयों की 
ये साए हैं ,दुनिया है परछाइयों है 
भरी भीड़ में , खाली तनहाइयों हैRead Details

सोच पर विजय कैसे मिले

सोच पर विजय कैसे मिले ? 


सोच पर विजय कैसे मिले ?
बहुत सोचा मैने फिर पाया कि हासिल कुछ नहीं आया,
फिर सोचा कि मैने इतना क्यों सोचा आखिर क्या पाने को,
लगा हाथ निर्णय मतलबी बन जाने को,
फिर सोचा अब नहीं सोचना है,
जीवन तो जीवन है इसे सफल बनाना है,
बस निकल पड़े बरस दर बरस,
यूं ही इस सोच में, आज मैं फिर सोच रहा हूं,
कि आखिर क्यों सोच रहा हूं ?
क्या सोच रहा हूं ?
किस लिये सोच रहा हूं?
उत्तर फिर भी यक्ष प्रश्न बना खड़ा पाता हूं, 
जीवन सफल बनाने को, 
आज भी सोचना मैं बंद नहीं कर पाता,
हर बार एक यक्ष प्रश्न 
इस उत्तर के साथ खड़ा पाता हूं,
कि बस अगले कदम पर ही तो मंजिल है
उसके बाद सोचने कि क्या जरुरत है ?
लेकिन कदम दर कदम चलने के बाद,
सिर्फ तृष्णा ही पाता हूं,
सोचना बंद करना तो दूर,
यह सोचने में लग जाता हूं,
कि आखिर इस सोचने,
पर कैसे विजय पा सकता हूं ?Read Details

कच्चे ख्वाब मेरे, मिट्टी के घर

कच्चे ख्वाब मेरे,
मिट्टी के घर से सजे अरमान मेरे,
आपने देखे,
कुछ ढले से अरमान मेरे,
जान कर हुयी ख़ुशी,
ऊपर से देखता था कोई,
छुपे हुए राज मेरे,
अब १ राजदार और बना है.
I do not know what I may appear to the world,
but to myself I seem to have been only like a boy playing on the seashore,
and diverting myself in now and then finding a smoother pebble or a prettier shell than ordinary,
whilst the great ocean of truth lay all undiscovered before me....

मुझे लगता कलम ही मेरी कमजोर है,
टूट रही अब ये सांसो की दोअर हैं,
छीन भिन्न, सा जीवन सारा,
रास्ते दोजख से लगते है,
जीवन महानार्गल,
मिथ्या भासित.

नव सूर्य,
नव किरण,
नयी रोशनी का समन्वय,
भोर हुयी अब ताजी,
रोज ही तो हुआ करती,
इसमें नया क्या है.

नयापन लाना है,
तो कुछ तत्पर हो जाइये,
अपने कर्म में सिद्ध हस्त,
कुछ व्यापक सा कहलाइए.
फिर वही सूर्य,
तप्त दावानल सा हो,
आप की दमक भी कम न होगी,
लोग सीखेंगे कुछ आपसे,
पर आप पेय समय की कमी होगी.Read Details

हम हैं काँटे ना कीजिए

हम हैं काँटे ना कीजिए नफ़रत
हम भी फूलों के साथ पलते हैं

लुत्फ़ इसका भी पूछिए उनसे
लड़खड़ाकर के जो संभलते हैं

वक्त आने पे आखरी देखा
लोग हसरत से हाथ मलते हैं

सो गये जिन्न खो गई परियाँ
बच्चे ना इनसे अब बहलते हैं

सच की पुख़्ता ज़मीन पे चलिए
देखिए फिर कहाँ फिसलते हैं

ग़म नहीं गर कहे बुरा दुनिया
अच्छे इंसा से लोग जलते हैं

जिस्म के साथ दिल नहीं थकता
कितने अरमां अभी मचलते हैं

ज़िंदगी भर क्या दौड़ोगे 
आओ कुछ देर को टहलते हैं...................Read Details

इस अजनबी सी दुनिया में,

इस अजनबी सी दुनिया में, अकेला इक ख्वाब हूँ.
सवालों से खफ़ा, चोट सा जवाब हूँ.

जो ना समझ सके, उनके लिये कौन.
जो समझ चुके, उनके लिये किताब हूँ.

दुनिया कि नज़रों में, जाने क्युं चुभा सा.
सबसे नशीला और बदनाम शराब हूँ.

सर उठा के देखो, वो देख रहा है तुमको.
जिसको न देखा उसने, वो चमकता आफ़ताब हूँ.

आँखों से देखोगे, तो खुश मुझे पाओगे.
दिल से पूछोगे, तो दर्द का सैलाब हूँ.Read Details

मैं कब कहता हूं जग

मैं कब कहता हूं जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने,
मैं कब कहता हूं जीवन-मरू नंदन-कानन का फूल बने ?
कांटा कठोर है, तीखा है, उसमें उसकी मर्यादा है,
मैं कब कहता हूं वह घटकर प्रांतर का ओछा फूल बने ?

मैं कब कहता हूं मुझे युद्ध में कहीं न तीखी चोट मिले ?
मैं कब कहता हूं प्यार करूं तो मुझे प्राप्ति की ओट मिले ?
मैं कब कहता हूं विजय करूं मेरा ऊंचा प्रासाद बने ?
या पात्र जगत की श्रद्धा की मेरी धुंधली-सी याद बने ?

पथ मेरा रहे प्रशस्त सदा क्यों विकल करे यह चाह मुझे ?
नेतृत्व न मेरा छिन जावे क्यों इसकी हो परवाह मुझे ?
मैं प्रस्तुत हूं चाहे मिट्टी जनपद की धूल बने-
फिर उस धूली का कण-कण भी मेरा गति-रोधक शूल बने !

अपने जीवन का रस देकर जिसको यत्नों से पाला है-
क्या वह केवल अवसाद-मलिन झरते आँसू की माला है ?
वे रोगी होंगे प्रेम जिन्हें अनुभव-रस का कटु प्याला है-
वे मुर्दे होंगे प्रेम जिन्हें सम्मोहन कारी हाला है

मैंने विदग्ध हो जान लिया, अन्तिम रहस्य पहचान लिया-
मैंने आहुति बन कर देखा यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला हैRead Details

युँ तो बहुत कुछ है

युँ तो बहुत कुछ है पास मेरे फिर भी कुछ कमी सी है
घिंरा हूँ चारो तरफ़ मुस्कुराते चेहरो से
फिर भी जिन्दगी में उजाले भरने वाली उस मुस्कुराहट की कमी सी है
दिख रही है पहचान अपनी ओर उठते हर नज़र में
फिर भी दिल को छु लेने वालि उस निगाह की कमी सी है
गुँज़ता है हर दिन नये किस्सो, कोलाहल और ठहाको से
फिर भी कानो में गुनगुनाति उस खामोशी कि कमी सी है
बढ़ रहे है कदम मेरे पाने को नयी मन्ज़िलें
फिर भी इन हाथो से छुट चुके उन नरम हाथो की कमी सी है.
"हमेशा हँसते रहो, हँसना ज़िन्दगी की जरूरत है,
जिन्दगी जियों इस अन्दाज़ में कि आप को देंखकर लगे की जिन्दगी कितनी खूबसूरत है....Read Details