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some one like golden ship
some one like silver ship
but i like one ship
that is your friendship



jyoti agrawal
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"Natkhat Dost"



Natkhat hai, Pyari hai,Gudiya rani hai,
Sab se alag who deewani hai,
Titliyo ki tarah udti hai,
Kabhi idhar -kabhi udhar milti hai,
Hasti hai hasati hai humko bhut satati hai,
Hai bhut choti par khud ko bada samajti hai,
Hamare har sukh -dukh mein,
Sath chalne ki kosish karti hai,
Karte hai hum bhi us se bhut pyar,
Sai Ram sabko de us jaisa yaar ...........



With Love "Amit Verma"
Ph - 0591-3200006
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खुदा से क्या मांगू तेरे वास्ते
सदा खुशियों से भरे हों तेरे रास्ते
हंसी तेरे चेहरे पे रहे इस तरह
खुशबू फूल का साथ निभाती है जिस तरह
सुख इतना मिले की तू दुःख को तरसे
पैसा शोहरत इज्ज़त रात दिन बरसे
आसमा हों या ज़मीन हर तरफ तेरा नाम हों
महकती हुई सुबह और लहलहाती शाम हो
तेरी कोशिश को कामयाबी की आदत हो जाये
सारा जग थम जाये तू जब भी गए
कभी कोई परेशानी तुझे न सताए
रात के अँधेरे में भी तू सदा चमचमाए
दुआ ये मेरी कुबूल हो जाये
खुशियाँ तेरे दर से न जाये
इक छोटी सी अर्जी है मान लेना
हम भी तेरे दोस्त हैं ये जान लेना
खुशियों में चाहे हम याद आए न आए
पर जब भी ज़रूरत पड़े हमारा नाम लेना
इस जहाँ में होंगे तो ज़रूर आएंगे
दोस्ती मरते दम तक निभाएंगे
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dosti karo to dhoka mat dena
dosto ko ansu ka tohfa mat dena
dil se roye koi tumhe yad karke
aisa kisi ko mouka mat dena
dosti to sirf itefak he
yeto dilo ki mulakat he
dosti nahi dekhati ye din he ki rat he
is meto sirf vafadari or jajbat he
dard kafi he jindgi ke liye
dost jaruri he jindgi ke liye
kon marta he kiske liye
ham to jinda he sirf aap jaise dost ke liye
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तुझ्या मैत्रिचा जिव्हाळा
म्हणजे माझ्यासाठी जणु उन्हाळ्यातही पावसाळा
तुझी मैत्रि म्हणजे आयुष्याच्या पुस्तकातलं
एखादं जाळीदार पान....
जसंजसं त्याचं आयुष्य वाढत जातं
तसंतसं त्याच्या सुंदरतेला तेज चढत जातं
तुझ्या मैत्रिविना आयुष्य धुसर धुसर वाटेल...
तशी वाट सापडेल जगण्याची...
पण...हातात माझ्या हक्काच असं काही नसेल
मैत्रिचा हा नाजुक धागा दोघांनीही आता सांभाळायला हवा
मैत्रि एक धर्म...यास दोघांनीही पाळायला हवा
येणारे येतात अन जाणारे जातातही... मैत्रि सगळ्यांशीच होत नाही
मैत्रि सहज होवुन जाते ... करायची ठरवली तरी ती करता येत नाही
तुझ्या माझ्या मैत्रिला वय नाही...
म्हणुनच वाटतं...तुझ्या माझ्या मैत्रिला भय नाही
मैत्रिचा ठेवा हा असाच जपुन ठेव
तु हस अन दु:ख तुझी माझ्याआड लपवुन ठेव
उद्या जर नसलोच तुझ्यासोबत तरी माझे शब्द असतील
तू हसत रहा माझ्यासाठी..तुला बघुन माझे शब्दही हसतील
शब्दांनी नाही सांगु शकणार अशी तुझी मैत्रि ....................
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