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Poems
>> Life
आज एक बार सबसे मुस्करा के बात करो
बिताये हुये पलों को साथ साथ याद करो क्या पता कल चेहरे को मुस्कुराना और दिमाग को पुराने पल याद हो ना हो आज एक बार फ़िर पुरानी बातो मे खो जाओ आज एक बार फ़िर पुरानी यादो मे डूब जाओ क्या पता कल ये बाते और ये यादें हो ना हो आज एक बार मन्दिर हो आओ पुजा कर के प्रसाद भी चढाओ क्या पता कल के कलयुग मे भगवान पर लोगों की श्रद्धा हो ना हो बारीश मे आज खुब भीगो झुम झुम के बचपन की तरह नाचो क्या पता बीते हुये बचपन की तरह कल ये बारीश भी हो ना हो आज हर काम खूब दिल लगा कर करो उसे तय समय से पहले पुरा करो क्या पता आज की तरह कल बाजुओं मे ताकत हो ना हो आज एक बार चैन की नीन्द सो जाओ आज कोई अच्छा सा सपना भी देखो क्या पता कल जिन्दगी मे चैन और आखों मे कोई सपना हो ना हो क्या पता कल हो ना हो जिन्दगी का पानी
जब छू लिया जाता है उठती हैं तरंगे हर उभार में सच और गर्त में भरम लिए मैं सोचता हूँ उस जिन्दगी को जो ठहरे पानी की है कहां रहता है उसका सच और किधर बहता है भरम उसका Zindagi hai choti , har pal mein khush raho...
Office me khush reho, ghar mein khush raho.. Aaj paneer nahi hai, dal mein hi khush raho, Aaj gym jane ka samay nahi, do kadam chal ke he khush raho.. Aaj Dosto ka sath nahi, TV dekh ke hi khush raho.. Ghar ja nahi sakte to phone kar ke hi khush raho... Aaj koi naraaz hai, uske iss andaz mein bhi khush raho.. Jisse dekh nahi sakte uski awaz mein hi khush raho... Jisse paa nahi sakte uske yaad mein he khush raho MBA karne ka socha tha, S/W mein he khush raho... Laptop na mila to kya, Desktop mein hi khush raho.. bita hua kal ja chuka hai, usse meeti yaadein hai,unme he khush raho.. aane wale pal ka pata nahi..sapno mein he khush raho.. Haste haste ye pal bitaenge, aaj mein he khush raho Zindagi hai choti , har pal main khush raho..... सभी शिकवे जमाने के दफ़न कर लेना सीने में,
जिंदगी का मज़ा क्या है अरे मर - मर के जीने में सभी शिकवे ज़माने के दफ़न कर लेना सीने में जिन्दगी एक तोहफा है खुदा कि लाख नियामत है, जरा पूंछो पत्थरों से जिन्हें ये ही शिक़ायत है मुझे क्यूँ रब ने ना दी जिन्दगी क्या थी खता मेरी, ठोकरें क्यूँ लिखीं तकदीर में ये तो बता मेरी ना सरदी है ना गरमी है ना पतझड़ है ना बरसातें, ना बूंदों कि ही रिमझिम का मज़ा सावन महीने में सभी शिकवे .................. ज़िन्दगी है कलश अमृत इसे भरपूर पिए जा, हवा का एक झोंका बन मज़ा इसका तू लिए जा जिन्दगी रंग से भर ले तितलियों के संग उड़कर, कदम आगे बढाता चल कभी मत देखना मुड़कर कभी मत कैद होना तू किसी कि चालबाजी में, किसी के हार कंगन में किसी मोती नगीने में सभी शिकवे जमाने के दफ़न कर लेना सीने में, जिंदगी का मज़ा क्या है अरे मर - मर के जीने में इस छोटी सी जिन्दगी के,
गिले-शिकवे मिटाना चाहता हूँ, सबको अपना कह सकूँ, ऐसा ठिकाना चाहता हूँ, टूटे तारों को जोड़ कर, फिर आजमाना चाहता हूँ, बिछुड़े जनों से स्नेह का, मंदिर बनाना चाहता हूँ. हर अन्धेरे घर मे फिर, दीपक जलाना चाहता हूँ, खुला आकाश मे हो घर मेरा, नही आशियाना चाहता हूँ, जो कुछ दिया खुदा ने, दूना लौटाना चाहता हूँ, जब तक रहे ये जिन्दगी, खुशियाँ लुटाना चाहता हूँ
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