Two & three liner short stories

10 Two & three liner short stories :-

1) She was very excited today, after all the school was re-opening after a long summer break.
Now, once again, she could start selling stationery at the traffic signal to feed her family.

2) She, a renowned artist and a strict mother, often scolded her 6-year-old son for he could never draw a line straight.
As he breathed slowly into the ventilator, she begged him to make one more crooked line on the ECG.

3) "Everyone goes with the flow… but the one who goes against it becomes someone remarkable.”
Before I could explain this to the traffic police, the man issued me a Fine.

4) Their love was different; She was happy every time he kicked her in the stomach.
Every time he kicked she loved him more. She waited for the time she would hold her baby for the first time.

5) All my toys are yours...!
Read her brother’s death note.

6) They took his father,
and only returned a flag.

7) At 25, I became a mother of one; at 27 I became a mother of two; and today, at 55, I have become a mother of three!
My son got married today, and brought home his wife!

8) “Born to rich parents, this boy is so lucky,” exclaimed the neighbors!
Somewhere in heaven, three unborn sisters cried.

9) “You ruined my career, I was supposed to be an executive director,” she thought to herself.
The little angel held her finger tightly and she forgot everything; A mother was born.

10) Once a 5-year-old boy was standing barefoot in the shallow water of the ocean.
He was repeating the same sentence to the waves – “Even if you touch my feet a thousand times, I won’t forgive you for taking my parents away.Read Details

I love Friend ship..............but have

I love Friend ship..............but have only FEW good friends.

I love Enjoyment..............but HARDLY have time.

I love Prayers...................but cant DEVOTE myself to god.

I love to be in Fear............but dont BELEIVE in ghosts.

I love Early morning..........but cant even wake up SO early.

I love to Lose..................but SORRY not possible with me.

I love to Listen..................but everyone wants me to SPEAK.

I love ma Parents..............but FAR away from them.

I love Dreams....................but have only FEW hours for sleep.

I love Singing....................but really have no IDEA about it.

I love Quality.....................but MAJORITY is in quantity.

I love Rules.......................but also knows how to BREAK them.

I love Studies....................but it is always BORING.

I love Gambling.................but not with LIFE.

I love Rhythm...................but always RUN fast.

I love to Play....................but not with HEARTS...Read Details

1. Don't undermine your worth

1. Don't undermine your worth by comparing yourself with others. It is because we are different that each of us is special.

2. Don't set your goals by what other people deem important. Only you know what is best for you. 

3. Don't take for granted the things closest to your heart. Cling to them as they were your life, for without them, life is meaningless.

4. Don't let your life slip through your fingers by living in the past or for the future. By living your life one day at a time, you live all the days of your life.

5. Don't give up when you still have something to give. Nothing is really over until the moment you stop trying.

6. Don't be afraid to admit that you are less than perfect. It is this fragile thread that binds us to each together.

7. Don't be afraid to encounter risks. It is by taking chances that we learn how to be brave.

8. Don't shut love out of your life by saying it's impossible to find time. The quickest way to receive love is to give; the fastest way to lose love is to hold it too tightly; and the best way to keep love is to give it wings.

9. Don't run through life so fast that you forget not only where you've been, but also where you are going.

10. Don't forget, a person's greatest emotional need is to feel appreciated.

11. Don't be afraid to learn. Knowledge is weightless, a treasure you can always carry easily.

12. Don't use time or words carelessly. Neither can be retrieved. Life is not a race, but a journey to be savoured each step of the way. Yesterday is history, tomorrow is a mystery, and today is a gift -- that's why we call it, `the present'.Read Details

कर्म की गति

"कर्म की गति"

एक कारोबारी सेठ सुबह सुबह जल्दबाजी में घर से बाहर निकल कर ऑफिस जाने के लिए कार का दरवाजा खोल कर जैसे ही बैठने जाता है, उसका पाँव गाड़ी के नीचे बैठे कुत्ते की पूँछ पर पड़ जाता है।  
दर्द से बिलबिलाकर अचानक हुए इस वार को घात समझ वह कुत्ता उसे जोर से काट खाता है। 

गुस्से में आकर सेठ आसपास पड़े 10-12 पत्थर कुत्ते की ओर फेंक मारता है पर भाग्य से एक भी पत्थर उसे नहीं लगता है और वह कुत्ता भाग जाता है। 

जैसे तैसे सेठजी अपना इलाज करवाकर  ऑफिस पहुँचते हैं जहां उन्होंने अपने मातहत मैनेजर्स की बैठक बुलाई होती है। 
यहाँ अनचाहे ही कुत्ते पर आया उनका सारा गुस्सा उन बिचारे प्रबन्धकों पर उतर जाता है। 
वे प्रबन्धक भी मीटिंग से बाहर आते ही एक दूसरे पर भड़क जाते हैं - 
बॉस ने बगैर किसी वाजिब कारण के डांट जो दिया था। 

अब दिन भर वे लोग ऑफिस में अपने नीचे काम करने वालों पर अपनी खीज निकलते हैं – 
ऐसे करते करते आखिरकार सभी का गुस्सा अंत में ऑफिस के चपरासी पर निकलता है जो मन ही मन बड़बड़ाते हुए भुनभुनाते हुए घर चला जाता है। 
घंटी की आवाज़ सुन कर उसकी पत्नी दरवाजा खोलती है और हमेशा की तरह पूछती है “आज फिर देर हो गई आने में.............”

वो लगभग चीखते हुए कहता है “मै क्या ऑफिस कंचे खेलने जाता हूँ ? 
काम करता हूँ, दिमाग मत खराब करो मेरा, पहले से ही पका हुआ हूँ, चलो खाना परोसो” 

अब गुस्सा होने की बारी पत्नी की थी, रसोई मे काम करते वक़्त बीच बीच में आने पर वह पति का गुस्सा अपने बच्चे पर उतारते हुए उसे जमा के तीन चार थप्पड़ रसीद कर देती है।

अब बिचारा बच्चा जाए तो जाये कहाँ, घर का ऐसा बिगड़ा माहौल देख, बिना कारण अपनी माँ की मार खाकर वह रोते रोते बाहर का रुख करता है, एक पत्थर उठाता है और सामने जा रहे कुत्ते को पूरी ताकत से दे मारता है। 

कुत्ता फिर बिलबिलाता है .........................

दोस्तों ये वही सुबह वाला कुत्ता था !!! 
अरे भई उसको उसके काटे के बदले ये पत्थर तो पड़ना ही था केवल समय का फेर था और सेठ जी की जगह इस बच्चे से पड़ना था !!! 
उसका कार्मिक चक्र तो पूरा होना ही था ना !!!

इसलिए मित्र यदि कोई आपको काट खाये, चोट पहुंचाए और आप उसका कुछ ना कर पाएँ, तो निश्चिंत रहें, उसे चोट तो लग के ही रहेगी, बिलकुल लगेगी, जो आपको चोट पहुंचाएगा, उस का तो चोटिल होना निश्चित ही है, 

कब होगा, किसके हाथों होगा 
ये केवल ऊपरवाला जानता है, पर होगा ज़रूर , 

अरे भई ये तो सृष्टी का नियम है !!!
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तितली का संघर्ष एक बार

तितली का संघर्ष 

एक बार एक आदमी को अपने garden में टहलते हुए किसी टहनी से लटकता हुआ एक तितली का कोकून दिखाई पड़ा. अब हर रोज़ वो आदमी उसे देखने लगा , और एक दिन उसने notice किया कि उस कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया है. उस दिन वो वहीँ बैठ गया और घंटो उसे देखता रहा. उसने देखा की तितली उस खोल से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है , पर बहुत देर तक प्रयास करने के बाद भी वो उस छेद से नहीं निकल पायी , और फिर वो बिलकुल शांत हो गयी मानो उसने हार मान ली हो.

इसलिए उस आदमी ने निश्चय किया कि वो उस तितली की मदद करेगा. उसने एक कैंची उठायी और कोकून की opening को इतना बड़ा कर दिया की वो तितली आसानी से बाहर निकल सके. और यही हुआ, तितली बिना किसी और संघर्ष के आसानी से बाहर निकल आई, पर उसका शरीर सूजा हुआ था,और पंख सूखे हुए थे.

वो आदमी तितली को ये सोच कर देखता रहा कि वो किसी भी वक़्त अपने पंख फैला कर उड़ने लगेगी, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. इसके उलट बेचारी तितली कभी उड़ ही नहीं पाई और उसे अपनी बाकी की ज़िन्दगी इधर-उधर घिसटते हुए बीतानी पड़ी.

वो आदमी अपनी दया और जल्दबाजी में ये नहीं समझ पाया की दरअसल कोकून से निकलने की प्रक्रिया को प्रकृति ने इतना कठिन इसलिए बनाया है ताकि ऐसा करने से तितली के शरीर में मौजूद तरल उसके पंखों में पहुच सके और वो छेद से बाहर निकलते ही उड़ सके.

वास्तव में कभी-कभी हमारे जीवन में संघर्ष ही वो चीज होती जिसकी हमें सचमुच आवश्यकता होती है. यदि हम बिना किसी struggle के सब कुछ पाने लगे तो हम भी एक अपंग के सामान हो जायेंगे. बिना परिश्रम और संघर्ष के हम कभी उतने मजबूत नहीं बन सकते जितना हमारी क्षमता है. इसलिए जीवन में आने वाले कठिन पलों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखिये वो आपको कुछ ऐसा सीखा जायंगे जो आपकी ज़िन्दगी की उड़ान को possible बना पायेंगे.Read Details

मन - मृत्यु तन और मन

मन - मृत्यु

तन और मन अनन्य थे, रस्सी के दो बल की तरह। तन कहता, मन मेरा प्राण है।मन कहता, तन मेरा जीवन है।
नेक अनबन हुई कि बुरी ठनी, उन दोनों में। बडबोलेपन से तू-तू मैं-मैं और वाकयुद्ध।.... दोनों की आंखों में लहू के डोरे खिंच गए थे।
तन ने होंठों पर हेय लाते हुए मन को दुत्कार दी- परजीवी मन, तुम मुझे छोड कर कहीं चले जाओं। सारा-सारा दिन गेंद बनाए हों। कभी यह करो, कभी वह करो। कभी यहां कभी वहां। एक पैर घर मे, तो एक बाहर । आकाश की उडाने, धरती की नापें। निन्यानवे के फेर मुझे घेरे रहते है। रातों की नींद हर ली है तुमने। जीना मुहाल किए हो। ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए मन सक्षम था। पर यह सोच कर कि तन की मैं को मारना है, वह खून के घूंट पी कर रह गया। बदसलूकी के प्रतिकार वह तन से दूर हो गया था। बिन मन, तन जडीभूत। वह अबनिश चारपाई पर पडा रहे। उसकी सब चाहें, महत्त्वाकांक्षाए और लालसाएं लप-लप सिमट गई। रूखाई, वीरानी, रिक्तता सुरसा हो गई।
उसका प्रातकालीन भ्रमण, व्यायाम, नहाना धोना जैसे नित्य कर्म छूट गए थे। लिखना, पढना संगोष्ठियों में भाग लेना जैसे सृजनात्मक आयाम अतीत बन गए थे। जीवनोन्मुख होने की हजार कोशिशें करता, लेकिन ढाक के वही तीन पात। म नही तो उसका सारथी था। दिन, हफ्ता, महीने, साल गए। तन खाट पर पडा-पडा खाट से लग गया था। और एक दिन सुर्खी थी, देश के एक उद्भट विद्वान की मन-मृत्यु हो गई।Read Details