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English Year Adopted, Vikram Samvwat forgotten

अँग्रेजी सन को अपनाया
विक्रम संवत भुला दिया है
अपनी संस्कृति, अपना गौरव
हमने सब कुछ लुटा दया है॥

जनवरी-फरवरी अक्षर-अक्षर
बच्चों को हम रटवाते हैं
मास कौन से हैं संवत के
किस क्रम से आते-जाते हैं
व्रत, त्यौहार सभी अपने हम
संवत के अनुसार मनाते
पर जब संवतसर आता है
घर-आँगन क्यों नहीं सजाते
माना तन की पराधीनता
की बेड़ी तो टूट गई है

भारत के मन की आज़ादी
लेकिन पीछे छूट गई है
सत्य सनातन पुरखों वाला
वैज्ञानिक संवत अपना है
क्यों ढोते हम अँग्रेजी को
जो दुष्फलदाई सपना है
अपने आँगन की तुलसी को,
अपने हाथों जला दिया है
अपनी संस्कृति,अपना गौरव,
हमने सब कुछ लुटा दिया है ॥

सर्वश्रेष्ठ है संवत अपना
हमको इसका ज्ञान नहीं हैं ...

- राजकुमार दायमा 7597740233


2014 कह रहा है bye-bye
और hello कहने को आतुर है 2015 
चल रहा है greetings का आदान-पदान
सज रहीं हैं खुशियों की महफिलें
संगीत की धुन पर थिरक रहे हैं कदम
जाते हुये साल में आओ भुला दें सारे गम
हर वर्ष की तरह हम पुराने calendar उतार फेंकेंगे
और फिर नये वर्ष के कैलेंडरों से दीवारों को सजाएंगे
पर मेरे दोस्तों, calendar बदलने से कुछ नहीं होगा
बदलना है तो अपने दिलों को बदलो
उतारना है तो उतार फेंको ये आडंबर का चोला
एक नजर उनकी तरफ डालो, जिनके कंधे पर है गरीबी का झोला,
अपने दिलों में करो इंसानियत का जज्बा रौशन
तभी सार्थक होगा नये साल का ये खुशियों भरा जशन,
ईष्या-द्वेष, काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह को अपने जीवन से भगाओ
अपने मन में सबके लिए प्रेम और सौहार्द जगाओ,

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