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अशोक चक्रधर की हास्यकविता

अशोक चक्रधर की हास्यकविता
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परेशान पति ने पत्नी से कहा –
एक मैं हूं जो तुम्हें निभा रहा हूँ
लेकिन अब,
पानी सर से ऊपर जा चुका है
इस लिये आत्म-हत्या करने जा रहा हूँ
पत्नी बोली – ठीक है,
लेकिन हमेशा की तरह
आज मत भूल जाना,
और लौटते समय
दो किलो आटा जरूर लेते आना
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पत्नी ने पति से कहा — तुम रोज-रोज
नदी में छलांग लगाने की कहते हो
लेकिन आज तक तुमने छलांग लगाई?
पति बोला — चेलैंज मत कर
वरना करके दिखा दूंगा,
अभी मैं तैरना सीख रहा हूँ
जिस दिन आ जाएगा
छलांग भी लगा दूंगा
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पति बोला — अगर तू
इतनी ही परेशान है
तो मुझे छोड़ क्यों नहीं देती,
ये पति-पत्नी का रिश्ता
तोड़ क्यों नही देती
पत्नी बोली — इतनी जल्दी भी क्या है
मेरे साजन भोले,
पहले तेरी सारी संपत्ति
मेरे नाम तो हो ले
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पत्नी ने सुबह-सुबह पति को जगाया
पति बड़बड़ाया –
दो मिनट बाद नहीं जगा सकती थी
ऐसी भी क्या जल्दी थी
कितना अच्छा सपना दिख रहा था,
राजा हरिस्चन्द्र बना मैं और मेरा परिवार
चौराहे पर बिक रह था
पत्नी बोली — फिर,
दो मिनट में वहां कौनसी तुम्हारे लिए
रोटी सिक लेती,
वह बोला — बेवकूफ,
रोटी सिकती या न सिकती
पर दो मिनट में
कम से कम तू तो बिक लेतीRead Details

पत्नी ने पती को सोते से

पत्नी ने पती को
सोते से उठाया
पती क्रोध से
आग बबूला हो कर
दहाड़ा
कैसी जाहिल पत्नी हो
मेरा सुन्दर सपना
तोड़ दिया
एक अप्सरा के संग
घूम रहा था
हसरतों का मंज़र
अधूरा रह गया
पत्नी ने धारा चंडी
का रूप
भभक कर बोली
क्या समझते हो तुम?
निरंतर सताते हो तुम
तुम्हारा
सपना टूट गया होगा
मेरा तो पूरा हो गया
पुराना प्रेमी लौट आया
साथ में तलाक के
कागज़ और चार गुंडों को
भी लाया
या तो कागजों पर
दस्तखत कर दो
जायदाद का आधा
मुझे दे दो
नहीं तो हाथ पैर
तुडवा लो
दहेज़ का मुकदमा भी
भुगत लो
सुन पत्नी की बात,
पति खुशी से उछलने लगा
फ़ौरन बोला
तुमसे पीछा छुडाने का
मौक़ा अच्छा है
आधी जायदाद और मुक्ति ?
सौदा सस्ता है.Read Details

Ek chadti hui Barat ko Dekhker ek

Ek chadti hui
Barat ko Dekhker
ek vyakti ka man dola
Apni patni se bola
Teen raniya thi
Raja dasrath ke
Is hisaab se to abhi
Hum teen sadiyaan aur
ker sakte hai bina Ruke
Sunker patni ne toka
Khub karo jaisa tumhe deekhe
Per itna dhyan rakhna
Panch pati the Dropati keRead Details

हमारे पेशेंस को आज़माकर, उन्हें

हमारे पेशेंस को आज़माकर, उन्हें मज़ा आता है
दिल को खूब जलाकर, उन्हें मज़ा आता है।

खूब बातें करके जब हम कहते हैं "अब फ़ोन रखूँ?"
बैलेंस का दिवाला बनाकर, उन्हें मज़ा आता है।

उन्हें मालूम है नौकरीवाला हूँ, मिलने आ नहीं सकता
पर मिलने की कसमें खिलाकर, उन्हें मज़ा आता है।

हम तो यूँ ही नशे में हैं, हमें यूँ न देखो
मगर जाम-ए-नैन पिलाकर, उन्हें मज़ा आता है।

हम खूब कहते हैं शादी से पहले यह ठीक नहीं
सोये अरमान जगाकर, उन्हें मज़ा आता है।

वैसे खाना तो वो बहुत टेस्टी बनाती हैं
मगर खूब मिर्च मिलाकर, उन्हें मज़ा आता है।

वो जानती हैं, हमारी कमज़ोरी क्या है, तभी
प्यार ग़ैर से जताकर, उन्हें मज़ा आता है।Read Details

पत्नी बोली आकर पति से, श्रीमान

पत्नी बोली आकर पति से,
श्रीमान जी,इधर तो आओ,...
प्रेम बस मुझे करते हो,
प्रमाण-पत्र दिखलाओ...

पति ने कहा, हे प्राण-प्रिये...
ये कैसी बात है बचकानी,
प्रेम बंधन है जनम-जनम का,
इसमे कैसी बेईमानी,...

रूप बदल बोली वो आकर,
हमको मत समझाओ,
करके मीठी बाते हमसे,
हमको मत बहलाओ....

आज पडौ़स के शर्माजी की,
हुई है बडी़ पिटाई,
प्रेम किया पडौ़सन से,
शादी कहीं और रचाई...

जो भी हो तुम आज,
नगर-पालिका जाओ,
मेरे प्रिय प्रेम की खातिर,
प्रमाण-पत्र बनवाओ...

पत्नी-भक्त पतिदेव जी,
चले नगर-पालिका के दफ़्तर,
देख प्रार्थना-पत्र,
हँस दिये सारे अफ़सर...

जन्म-मरण का प्रमाण-पत्र,
सब कोई बनवाये,
प्रेम-प्रमाण-पत्र बनवाने,
पहले मूरख तुम आये...

फ़िर भी चलो नाम बतलाओ,
मेज़ के नीचे से नग़दी सरकाओ,

प्रमाण-पत्र कोई हो,
बन ही जाते है,
इसीलिए तो मट्रिक पास,
प्रोफ़ेसर बन जाते है,...

देख बहुत हैरान हुए वो,
आये मुँह लटकाकर,
बोले प्रिये नही प्रमाण है,
सुन लो कान लगाकर...

सब कुछ बिकता है दुनिया में,
प्रेम ना खरीदा जाये,
जो पाले इस धन को,
वो प्रमाण-पत्र क्यूँ बनवाये...

फ़िर भी तुमको यकिं नही है,
तो बसRead Details