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गाँव री याद - परदेसी तेरा गाँव बुलाये

घर आज्या परदेसी तेरा गाँव बुलाये रे. ..

🌳🐪🌾"गाँव री याद"🌾🐪🌳


गाँव रा गुवाड़ छुट्या, लारे रह गया खेत 
धोरां माथे झीणी झीणी उड़ती बाळू रेत 

उड़ती बाळू रेत , नीम री छाया छूटी 
फोफलिया रो साग, छूट्यो बाजरी री रोटी 

अषाढ़ा रे महीने में जद,खेत बावण जाता 
हळ चलाता,बिज बिजता कांदा रोटी खाता

कांदा रोटी खाता,भादवे में काढता'नीनाण'
खेत मायला झुपड़ा में,सोता खूंटी ताण 

गरज गरज मेह बरसतो,खूब नाचता मोर 
खेजड़ी , रा खोखा खाता,बोरडी रा बोर 

बोरडी रा बोर ,खावंता काकड़िया मतीरा 
श्रादां में रोज जीमता, देसी घी रा सीरा 

आसोजां में बाजरी रा,सिट्टा भी पक जाता
काती रे महीने में सगळा,मोठ उपाड़न जाता

मोठ उपाड़न जाता, सागे तोड़ता गुवार 
सर्दी गर्मी सहकर के भी, सुखी हा परिवार

गाँव के हर एक घर में, गाय भैंस रो धीणो
घी दूध घर का मिलता, वो हो असली जीणो

वो हो असली जीणो,कदे नी पड़ता बीमार
गाँव में ही छोड़आया ज़िन्दगी जीणे रो सार

सियाळे में धूंई तपता, करता खूब हताई
आपस में मिलजुल रहता सगळा भाई भाई

कांई करा गाँव की,आज भी याद सतावे 
एक बार समय बीत ग्यो,पाछो नहीं आवे
 

🙏🏻कृपा गाँव को याद करके रोना मत रोने से अच्छा है एक बार गाँव हो आना मन हल्का हो जायेगा और मन  को सुकून मिलेगा. ..

जार जार क्यों रोता है

शहीदों को शत् शत् नमन....आओ मँथन करें-


जार जार क्यों रोता है
=-=-=-=-=-=-=-=-=

भगत तेरा केसरिया बाना,
जार जार क्यों रोता है

मथकर  मर्यादाएं  हमला,
बार बार  क्यों होता है

चंद्र ग्रसित है गोपीचंद से,
सुप्त सुभाष सा सागर है

संसद में संविधान सदा ही,
हार हार क्यों सोता है

दिल्ली दहली सहमा सूरत,
गमज़दा गोहाटी की गलियां

बोम्बे की बगिया में कीकर,
खार खार क्यों बोता है

-राज बिजारणियाँ

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हुआ हुक्म जब फांसी का तो भगत सिंह यूँ मुस्काया
बोला माँ अब गले लगा लो मुद्दत में मौक़ा आया
तख़्ते फाँसी कूंच पेजब क़दमों की आहट आती थी
तो दीवारें भी झूम-झूम कर वंदेमातरम् गाती थीं
चूम के फाँसी का फन्दा जब इंक़लाब वो बोला था
काँप उठी थी वसुंधरा अंग्रेज़ी शासन डोला था
आख़िर बोला यही वसीयत ऐ रखवाले करता हूँ
माँ की लाज बचा लेना अब तुम्हे हवाले करता हूँ
आओ तुमको इंक़लाब की ताक़त मैं दिखलाता हूँ
छोड़ दिए तुमने जो पन्ने उनकी याद दिलाता हूँ ।

Le Chale Hum Rashtra Nauka ko

ले चले हम राष्ट्र नौका को भंवर से पार कर
केसरी बाना सजायें वीर का श्रृंगार कर 
डर नही तूफ़ान बादल का अँधेरी रात का
डर नही है धूर्त दुनिया के कपट के घात का
नयन में ध्रुव ध्येय के अनुरूप ही दृढ़ भाव भर 
है भरा मन में तपस्वी मुनिवरों का त्याग है
और हृदयों में हमारे वीरता की आग है
हाथ है उद्योग में रत राष्ट्र सेवा धार कर

दोलत ना अता करना मोल्ला

दोलत ना अता करना मोल्ला ,
शोहरत ना अता करना मोल्ला ,
बस इतना अता करना चाहे जन्नत ना अता करना मोल्ला ,
शमाए वतन की लोह पर, 
जब कुर्बान पतंगा हो ,
होठो पर गंगा हो , 
हाथो में तिरंगा हो। ...

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी
बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी

चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

कानपूर के नाना की, मुँहबोली बहन छबीली थी
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी
नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी
बरछी ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी

वीर शिवाजी की गाथायें उसकी याद ज़बानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

लक्ष्मी थी या दुर्गा थी, वह स्वयं वीरता की अवतार
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार
नकली युद्ध व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवाड़

महाराष्टर कुल देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झांसी में
ब्याह हुआ रानी बन आयी लक्ष्मीबाई झांसी में
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छायी झांसी में
सुघट बुंदेलों की विरुदावलि सी वह आयी झांसी में

चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव से मिली भवानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजयाली छायी
किंतु कालगति चुपके चुपके काली घटा घेर लायी
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भायी
रानी विधवा हुई, हाय विधि को भी नहीं दया आयी

निसंतान मरे राजाजी रानी शोक समानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

बुझा दीप झाँसी का तब डलहौज़ी मन में हर्षाया
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया
फ़ौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झांसी आया

अश्रुपूर्ण रानी ने देखा झांसी हुई बिरानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

अनुनय विनय नहीं सुनती है, विकट फिरंगी की माया
व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया
डलहौज़ी ने पैर पसारे, अब तो पलट गई काया
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया

रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

छिनी राजधानी दिल्ली की, लखनऊ छीना बातों बात
कैद पेशवा था बिठुर में, हुआ नागपुर का भी घात
उदैपुर, तंजौर, सतारा, कर्नाटक की कौन बिसात?
जबकि सिंध, पंजाब ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात

बंगाले, मद्रास आदि की भी तो वही कहानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

रानी रोयीं रनवासों में, बेगम ग़म से थीं बेज़ार
उनके गहने कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार
सरे आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार
नागपूर के ज़ेवर ले लो लखनऊ के लो नौलख हार

यों परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

कुटियों में भी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान
वीर सैनिकों के मन में था अपने पुरखों का अभिमान
नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान
बहिन छबीली ने रण चण्डी का कर दिया प्रकट आहवान

हुआ यज्ञ प्रारम्भ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी
यह स्वतंत्रता की चिन्गारी अंतरतम से आई थी
झांसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी
मेरठ, कानपूर, पटना ने भारी धूम मचाई थी

जबलपूर, कोल्हापूर में भी कुछ हलचल उकसानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

इस स्वतंत्रता महायज्ञ में कई वीरवर आए काम
नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम
अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम
भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम

लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

इनकी गाथा छोड़, चले हम झाँसी के मैदानों में
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में
लेफ्टिनेंट वाकर आ पहुँचा, आगे बड़ा जवानों में
रानी ने तलवार खींच ली, हुया द्वन्द्ध असमानों में

ज़ख्मी होकर वाकर भागा, उसे अजब हैरानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

रानी बढ़ी कालपी आयी, कर सौ मील निरंतर पार
घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार
यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खायी रानी से हार
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार

अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

विजय मिली पर अंग्रेज़ों की, फिर सेना घिर आई थी
अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुहँ की खाई थी
काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी
युद्ध श्रेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी

पर पीछे ह्यूरोज़ आ गया, हाय घिरी अब रानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

तो भी रानी मार काट कर चलती बनी सैन्य के पार
किन्तु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार
घोड़ा अड़ा नया घोड़ा था, इतने में आ गये सवार
रानी एक शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार पर वार

घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीरगति पानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी


Kailash Sharma - Sent by Mail

वन्दे मातरम् सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् शस्यशामलां

वन्दे मातरम् 
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
शस्यशामलां मातरम् । 
शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं 
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं 
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं
सुखदां वरदां मातरम् ।। १ ।। वन्दे मातरम् ।
कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले
कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले, 
अबला केन मा एत बले ।
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं 
रिपुदलवारिणीं मातरम् ।। २ ।। वन्दे मातरम् ।
तुमि विद्या, तुमि धर्म 
तुमि हृदि, तुमि मर्म
त्वं हि प्राणा: शरीरे 
बाहुते तुमि मा शक्ति, 
हृदये तुमि मा भक्ति, 
तोमारई प्रतिमा गडि 
मन्दिरे-मन्दिरे मातरम् ।। ३ ।। वन्दे मातरम् ।
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी 
कमला कमलदलविहारिणी
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम् 
नमामि कमलां अमलां अतुलां 
सुजलां सुफलां मातरम् ।। ४ ।। वन्दे मातरम् ।
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां 
धरणीं भरणीं मातरम् ।। ५ ।। वन्दे मातरम्

jab zero diya mere bharat

jab zero diya mere bharat ne,
duniya ko tab ginatee aayee

taaro kee bhasha bharat ne,
duniya ko pahale sikhalayee

deta naa dashamal bharat toh,
yu chaand pe jaana mushkil tha

dharatee aur chaand duree kaa,
andaaja lagaana mushkil tha

sabhyata jaha pahale aayee,
pahale janamee hain jaha pe kala

apana bharat woh bharat hai,
jiske pichhe sansaar chala

sansaar chala aur aage badha,
yu aage badha badhata hee gaya

bhagwaan kare yeh aur badhe,
badhata hee rahe aur fule fale


jai hind

जय जय भारत नमस्ते सदा वत्सले

जय जय भारत

नमस्ते सदा वत्सले मात्रुभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखम वर्धितोऽहम
महा मन्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते

प्रभो शक्तिमन हिन्दुराष्ट्रांग भूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम
त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयम
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये

अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत
श्रुतं चैव यत कन्टकाकीर्ण मार्गम
स्वयम स्वीक्रुतं न: सुगं कारयेत

समुत्कर्श नि:श्रेयसस्यैकमुग्रम
परम साधनं नाम वीरव्रतम
तदन्त: स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्टा
ह्रुदन्त: प्रजा गर्तुतीव्रानिशम

विजेत्री च न: संहता कार्यशक्तिर
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम
परम वैभवं नेतुमेतत स्वराष्ट्रम
समर्था भवत्वाशिषाते भ्रुशम
।। भारत माता की जय ।।

"राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अर्थ है- राष्ट्र की सेवा करने हेतु स्वयंप्रेरणा से स्वयं ही अग्रेसर होनेवाले लोगों द्वारा राष्ट्र कार्य के लिये स्थापित संघ ।" -- परमपूजनीय डा. 

नमस्कार,प्रिय बंदु में आप से रा.स्वयं,संघ. में जुड़ने का निवेदन करता हु 
By a RSS Member

आतंकवाद किसने लूटी है ये

आतंकवाद
किसने लूटी है ये वसुंधरआ
किसने हरियाली में रक्त भरा
गोलियाँ चलती हैं बमों के धमाकें हैं
इंसां मरते हैं जैसे जलते पटाखे हैं
कौन ले गया है अमन और चैन जहाँ से
चारों दिशा में गूँजता यह किसका नाद है
यह आतंकवाद है यह आतंकवाद है
सोनिया कालरा

क्या क़ीमत है आज़ादी की हमने

क्या क़ीमत है आज़ादी की
हमने कब यह जाना है
अधिकारों की ही चिन्ता है
फर्ज़ कहाँ पहचाना है

आज़ादी का अर्थ हो गया
अब केवल घोटाला है
हमने आज़ादी का मतलब
भ्रष्टाचार निकाला है

आज़ादी में खा जाते हम
पशुओं तक के चारे अब
हर्षद और हवाला हमको
आज़ादी से प्यारे अब

आज़ादी के खेल को खेलो
फ़िक्सिंग वाले बल्लों से
हार के बदले धन पाओगे
सटटेबाज़ों दल्लों से

आज़ादी में वैमनस्य के
पहलु ख़ूब उभारो तुम
आज़ादी इसको कहते हैं?
अपनों को ही मारो तुम
आज़ादी का मतलब अब तो
द्वेष, घृणा फैलाना है ॥

आज़ादी में काश्मीर की
घाटी पूरी घायल है
लेकिन भारत का हर नेता
शान्ति-सुलह का कायल है
आज़ादी में लाल चौक पर
झण्डे फाड़े जाते हैं
आज़ादी में माँ के तन पर
चाक़ू गाड़े जाते है

आज़ादी में आज हमारा
राष्ट्र गान शर्मिन्दा है
आज़ादी में माँ को गाली
देने वाला ज़ीन्दा है

आज़ादी मे धवल हिमालय
हमने काला कर डाला
आज़ादी मे माँ का आँचल
हमने दुख से भर डाला

आज़ादी में कठमुल्लों को
शीश झुकाया जाता है
आज़ादी मे देश-द्रोह का
पर्व मनाया जाता है

आज़ादी में निज गौरव को
कितना और भुलाना है ?

देखो! आज़ादी का मतलब
हिन्दुस्तान हमारा ह

आजादी बे मोल नही चढ़ती परवान

आजादी बे मोल
नही चढ़ती परवान 
सुहागिनों का सिन्दूर
,बहनों का स्नेह सूत्र 
अबोध काया का साया 
पिता का दुलार 
ममतामयी माँ का आंचल बिसरा के 
निकल पड़ते हैं वीर जवान 
,देश की खातिर 
करने सबकुछ कुर्बान,
रखनी हें हमवतनों को वतन की आन का मान
उनके लिये क्या मायना रखती हें जान 
मारेंगे या मर मिटेंगे हो जायेंगे कुर्बान 
वो हें या न रहे सलामत रहेगी देश की आन 


लेखिका - रजनी छाबरा

मन समर्पित, तन समर्पित और यह

मन समर्पित, तन समर्पित
और यह जीवन समर्पित
चाहता हूँ देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं

माँ तुम्हारा ॠण बहुत है, मैं अकिंचन
किन्तु इतना कर रहा फिर भी निवेदन
थाल में लाऊँ सजा कर भाल जब भी
कर दया स्वीकार लेना वह समर्पण

गान अर्पित, प्राण अर्पित
रक्त का कण कण समर्पित
चाहता हूँ देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं

मांज दो तलवार, लाओ न देरी
बाँध दो कस कर क़मर पर ढाल मेरी
भाल पर मल दो चरण की धूल थोड़ी
शीश पर आशीष की छाया घनेरी

स्वप्न अर्पित, प्रश्न अर्पित
आयु का क्षण क्षण समर्पित
चाहता हूँ देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं

तोड़ता हूँ मोह का बन्धन, क्षमा दो
गांव मेर7, द्वार, घर, आंगन क्षमा दो
आज सीधे हाथ में तलवार दे दो
और बायें हाथ में ध्वज को थमा दो

यह सुमन लो, यह चमन लो
नीड़ का त्रण त्रण समर्पित
 चाहता हूँ देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं

धमाकों के तमाचों से आंखें

धमाकों के तमाचों से आंखें तो खुली होंगी,
गर अब भी न उठा हाथ तो यह बुज़दिली होगी।
चूहे-बिल्ली का यह खेल आखिर कब तक चलेगा,
आज दहली है मुंबई, कल ख़ाक में दिल्ली होगी।
है गफ़लत कि ऊंघती सरकारें जागेंगी धमाकों के शोर से,
सियासतदानों की कुछ देर को महज कुर्सी हिली होगी।
ज़ंग ज़रूरत है अमन की हिफाज़त के लिए वरना,
ख़िज़ा के साये तले सहमी चमन की हर कली होगी।
"सौ सुनार की तो एक लोहार की" याद रहे "कुरील",
जब हम लेंगे हिसाब तो हर चोट की वसूली होगी

मुंबई आतंकी हमले में अभी

मुंबई आतंकी हमले में अभी तक 101 मासूम निर्दोषों को और 5 सैनिकों को हम खो चुके हैं...और अभी जारी हैं...

अब तो करलो बुद्धि मित्र ठिकाने पर
मुंबई भी रक्खी हैं आज निशाने पर
सौ-सौ लोगों को खोकर भी खामोशी
कब टूटेगी सिंघासन की बेहोशी

अंधे लालच का सिन्धु भरके चित में
ध्रतराष्ट्र हैं मौन स्वयं-सूत के हित में
वरना वो खुनी पंजे तुड़वा देते
अब तक अफजल पे कुत्ते छुड़वा देते

जो ये कहते हैं भारत के रक्षक हैं
वो ही अफजल जैसों के संरक्षक हैं
बेशक सरे भारत का सर झुक जाये
उनकी कोशिश हैं ये फंसी रुक जाये

निर्णय लेना होगा अब सरकारों को
पहले फांसी होगी इन गद्दारों को

एक बार फिर दहते स्वर में इन्कलाब गाना होगा
फांसी का तख्ता जेलों से संसद तक लाना होगा.

tere charno me-4jhuka math hai-3tere

tere charno me-4
jhuka math hai-3
tere charno me

aakash jiski dhvajey udata
jo hai yugo se dhara par suhata
tu hai vo hi maan mandir hamara-2
kad-kad jise jodta hath hai-2
jhuka math hai-3
tere charno me

hamko bata kis jagha kya kare ham
kis ghaat par kaun sa ghat bhare ham
jage hue desh ki aarti me-2
jagi hoi bharti sath hai-2
jhuka math hai-9
tere charno me
BY-RISHABH GARG

tere charno me-4jhuka math hai-3tere

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jo hai yugo se dhara par suhata
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jage hue desh ki aarti me-2
jagi hoi bharti sath hai-2
jhuka math hai-9
tere charno me

है हिन्दू तू है एक

है हिन्दू तू है एक अवतारी !
तेरी कदर इश दुनिया में किशी ने न जानी!!
उठ खडा हो बना अपनी पह्सान !
तेरे आगे जुकेंगे जमीन व आश्मन !!
तू ही है इश दुनिया का तारनहार !
किये है तुने इश दुनिया पर कितने उपकार!!
तेरे अंदर बशा है वह राम !
जीशे लोग करते है रोज प्रणाम !!
तुने दिया है हमेशा सच का साथ !
उठ खडा हो आज बढा अपना हाथ !!
तेरी माँ आज तुजे पुकार रही है ! 
तुजे अपने बारे में कुश बता रही है !!
हो रहे है आज उनके ऊपर कितने अत्याचार !
देख आज कितना फेल रहा है भ्रष्टाचार !!
बे दर्द जमाना कर रहा है उनका अपमान !
भूल गया वो उन लोगो का बलिदान !!
है हिन्दू तुमको उन बलिदानों का वास्ता !
करना होगा तुजे इन अत्यासार का सामना !!
सीमा पर खड़ी हमारे भाइयो की टोलिया !
जेल रही है अपने सिने पर दुश्मन की गोलिया !!
जिसने तेरी माँ के सपूत सिने है ! 
आज तुमको उन दुस्मनो को गिनने है !!

जब सोई थी सारी दुनिया

जब सोई थी सारी दुनिया , जागा था हिन्दुस्तान नया 
गणतंत्रदिवस की रात नयी, था दिन भी कितना नया नया

था कोटि कोटि हाथों में जब लहराता अपना ध्वज प्यारा 
आज़ादी की खुशबू से जब था महक उठा भारत सारा

आज़ादी के दीवानों ने कैसे कैसे बलिदान दिए 
उस भरी जवानी में उनने भर भर कर प्याले ज़हर पिए 

था एक हमारा भगत सिंह चूमा फांसी के फंदे को 
ऊधम ने अपनी गोली से जड़ दिया फिरंगी बन्दे को 

था एक हमारा वो सुभाष जिसकी सेना आजाद हिंद 
दुश्मन की छाती पर चढ़कर जो गरज उठा था विजयहिंद 

था एक जवाहर हीरे सा जिसका नारा था पंचशील 
दुनिया को जिसने सिखलाया हम रहें सदा आओ हिलमिल 

आत्मा थी जिसकी बड़ी प्रबल काया से था कमज़ोर मगर 
जब निकल पड़ा गांधी बाबा हट गए फिरंगी छोड़ डगर

केसरिया वो तिलक लगा के देश

केसरिया वो तिलक लगा के
देश भक्ति के भाव जगा के
आज़ादी की अलख जगा के
मिल के गायें हम 
वन्दे मातरम...
वन्दे मातरम
दुनियाँ भर मे हम छा जायें
भारत माँ की शान बढायें
सच के रस्ते बढते जायें
फिर दोहरायें हम 
वन्दे मातरम...
वन्दे मातरम
भेद भाव सब दूर भगा के
भारत से आतंक मिटा के
जान का अपनी दाँव लगा के
बढते जायें हम 
वन्दे मातरम...
वन्दे मातरम 


गणतन्त्र दिवस की आप को भी हार्दिक शुभकामनायें|

तिरंगा फहराऒ रोज॰॰॰॰॰ खेलो कूदो पढ़ो

तिरंगा फहराऒ रोज॰॰॰॰॰


खेलो कूदो पढ़ो लिखो, फहराऒ तिरंगा रोज
राष्टू गौरव इसी से बढ़ेगा, हम सब की हो सोच 

खेलने से स्फूर्ती बढ़ती,
पढ़ने से आत्मशक्ति,
राष्टू ध्वज अपनाने से,
एकता बढ़ती हम सबकी,
आऒ मिलकर फहरायें, 
तिरंगा झण्डा रोज
राष्टू-माता के चरणों में, 
शीश नवायें हम लोग,


खेलो कूदो पढ़ो लिखो, फहराऒ तिरंगा रोज,
राष्टू गौरव इसी से बढ़ेगा, हम सब की हो सोच

=--..__..-=-._.!=--..__..-=-._;!=- [email protected]=-._;!=--..__..-=-._;!ii!!HAPPY REPUBLICAN DAYLet's Sing

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HAPPY REPUBLICAN DAY
Let's Sing with me our National anthem
n' salute to our INDIA

भाई के दुश्मन भाई ना

भाई के दुश्मन भाई ना होते,
महल आशा के धराशाई ना होते,
काश, यहाँ इंसान बनकर जीते सभी,
तो हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई ना होते. 
अंतर्मन से सोचें...........देश आज़ाद है, 
हम आज़ाद नहीं. मानसिक रूप से आज भी हम 
अंग्रेज़ो के गुलाम हैं और मुक्ति का प्रयास भी नहीं करते, 
क्योंकि हमारी सोच में हम आज़ाद हैं.
मुझ जैसे तो लाखों हैं, मुझमें कुछ नहीं, पर तुम लाखों में एक हो,
तुम जैसा कोई नहीं......!!!!

भारत माता को शत शत नमन.......!! 
कोटि कोटि प्रणाम....!!जय हिंद....!! वंदे मातरम.......!!


विजय व्यास

है लिये हथियार दुश्मन ताक

है लिये हथियार दुश्मन ताक मे बैठा उधर
और हम तैय्यार है सीना लिये अपना इधर
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल मे है

सर्फरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल मे है

हाथ जिनमे हो जुनून कट्ते नही तलवार से
सर जो उठ जाते ह वोह झुकते नही लल्कार से
हाथ जिनमे हो जुनून कट्ते नही तलवार से
सर जो उठ जाते ह वोह झुकते नही लल्कार से
और भडकेगा जो शोल-सा हमारे दिल मे है

सर्फरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल मे है

हम तो घर से निकले हि थे बांध्कर सर पे कफ़न
चाहतें लिन भर लिये लो भर चले हैन ये कदम
जिंदगि तो अपनि मेहमान मौत कि मेहफ़िल मे है

सर्फरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल मे है

दिल मे तूफानों की तोली और नसों मेइन इन्कलाब
होश दुश्मन के उडा देंगे हमे रोको न आज
दूर रेह पाये जो हमसे दम कहान मंजिल मे है

सर्फरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल मे है

जन गण मन अधिनायक जय

जन गण मन अधिनायक जय हे
भारत भाग्यविधाता
पंजाब सिन्धु गुजरात मराठा
द्राविड़ उत्कल बंगा
विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा
उच्छल जलधि तरंगा
तव शुभ नामे जागे
तव शुभ आशीष मांगे
गाहे तव जयगाथा

जन गण मंगलदायक जय हे
भारत भाग्यविधाता
जय हे, जय हे, जय हे
जय जय जय जय हे!

हिन्दुस्तान हमारा है यही हमारा

हिन्दुस्तान हमारा है 

यही हमारा नारा है
हिन्दुस्तान हमारा है

जाती अलग है धरम अलग है 
हम सबके करम अलग है

किसी का मन्दिर किसी की मस्जिद
किसी का यहा गुरुद्वारा है. 

पर कुछ भी हो देखो
भारत ही मन्दिर गुरुद्वारा है. 
यही हमारा नारा है हिन्दुस्तान हमारा है. 

इसके दुश्मन बहोत है
कुछ बाहर कुछ अन्दर की तरफ
हमे इनसे लढना पडेगा 
चाहे आग हो चाहे बरफ
आखिर देखो भुलना ना 

भारत वतन हमारा प्यारा है 
यही हमारा नारा है हिन्दुस्तान हमारा है 

खोखली हो गयी है नीव इसकी 
मानते है हम सब इसको
पर मानने से क्या होगा ?
आओ मजबूत बनाये नीव को 

याद रखना भुल न जाना
हमारा घर भारत सारा है 
यही हमारा नारा है हिन्दुस्तान हमारा है 

हमारा हमारा भारत सारा
ये है हमको सबसे प्यारा
हम सब मिलकर बनायेगे सको
सारे जहा से सबसे न्यारा 

आओ ये हिन्दुस्तानीयो 
तुम्हे भारत मां ने पुकारा है 

यही हमारा नारा है
हिन्दुस्तान हमारा है.

करत करत अभ्यास के जड़मती

करत करत अभ्यास के जड़मती होय सुजान
हो गई है ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ देखो कैसे ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰
साठ सालों मे नेता बेईमानी में मजबूत हो गये हैं 
पुलिस वाले अपना धर्म भूल गये है
प्रशासन है कि उसे फर्ज याद दिलाना पड़ता है
सूद खोरों को चल पड़ी है 
जीरो परसेंट ब्याज मे भी जनता लुटी पड़ी है
पहले कुछ शर्मा लिया करते थे
अब उन्हे शर्म भी नहीं आती
आम जनता की भी करत करत अभ्यास के
इन साठ सालों मे आदत बन गइ है
गुलाम भारत से ज्यादा 
गुलामी सहने कि लत लग गइ है
अब सब जड़ों तक सुजान हो गये हैं
मेरा भारत महान के किरदार हो गये हैं

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए कातिल में है
करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ए शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चरचा गैर की महफ़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ए आसमान,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है
खैंच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद,
आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
है लिये हथियार दुशमन ताक में बैठा उधर,
और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर.
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
हाथ जिन में हो जुनून कटते नही तलवार से,
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से.
और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
हम तो घर से निकले ही थे बाँधकर सर पे कफ़न,
जान हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम.
जिन्दगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,झण्डा ऊँचा

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,झण्डा ऊँचा रहे हमारा।
सदा शक्ति बरसाने वाला
वीरों को हरसाने वाला
प्रेम सुधा सरसाने वाला
मातृभूमि का तन मन सारा,झण्डा ऊँचा रहे हमारा।१।
लाल रंग बजरंगबली का
हरा अहल haryali का
श्वेत shaanti का टीका
एक हुआ रंग न्यारा-न्यारा,झण्डा उँचा रहे हमारा ।२।
है चरखे का चित्र संवारा
मानो चक्र सुदर्शन प्यारा
हरे रंग का संकट सारा
है यह सच्चा भाव हमारा,झण्डा उँचा रहे हमारा ।३।
स्वतंत्रता के भीषण रण में
लखकर जोश बढ़े क्षण-क्षण में
कांपे शत्रु देखकर मन में
मिट जायें भय संकट सारा,झण्डा ऊँचा रहे हमारा।४।
इस झण्डे के नीचे निर्भय
ले स्वराज्य का अविचल निश्चय
बोलो भारत माता की जय

अपना देश बनेगा दुनिया का

अपना देश बनेगा दुनिया का सरताज
देश की जिसने सबसे पहले जीवन ज्योति जलाई
और घ्यान की किरने सारी दूनाया मे फैलाई
लोभ मोह के भ्रम से सारे ज ग को मुक्त कराया
मित्र भावना का प्रकाश सारे ज ग मे फैलाया
अनगनित बार बचाई जिसने मानवता की लाज
अपना देश बनेगा सारी दुनिया का सरताज
इतना प्रेम की पशु पक्षी तक प्रानो से प्यारे
इतनी दया की जीव मात्र सब परिजन सखा हमारे
श्रद्धा अपरम्पार की पत्थर मे भी प्रीति जगाओ
और परक्रम एसा की री पु भी करे बड़ाई
उसी प्रेरणा से रच हम फिर से नया समाज
अपना देश बनेगा सारी दुनिया का सरताज
मानवता के लिए जिसेने हड्डिया तक दे डाली
मताओ की अनेको बार हुई गो दिया ख़ाली
प र पाप के आगे उनने कभी ना सिर झुकाया
संस्कृति का मान सम्मान बाड़ने हॅश हॅश कर
शीश कटाया....... अपना देश बनेगा सारी...
रहे शिवाजी अर्जुन जैसा नी ज चरित्र प र नाज़
अपना देश बनेगा सारी दुनिया का सरताज
दिया न्याय का साथ भले ही हारे अथवा जीते
इसी भूमि प र वेद पुरानो ने भी शोभा पाई
जन्म अनेको बार यहा लेते आए रघुराई
स्वागत करने को न व युग का नया सजाए साज़
अपना देश बनेगा दुनिया का सरताज
सोए स्वाभिमान को आओ सब मिलकर जगाय
न व जागराती के आदर्शो को दुनिया मे फैलाए
अपना देश बनेगा दुनिया का सरताज