Poems >> Positive
सफ़र को जब भी किसी दास्ताँ मे रखना कदम यकीन मे, मंजिल गुमान मे रखना, जो साथ है वही घर का नसीब है लकिन, जो खो गया है उसे भी मकान मे रखना, जो देखती है निगाहे वही नहीं सब कुछ, ये एतिहात भी अपने बयान मे रखना, वो एक ख्वाब जो चेहरा कभी नहीं बनता, बना के चाँद उसे आश्मान मे रखना, चमकते चाँद सितारों का क्या भरोषा है, जमी की धुल भी अपनी उडान मे रखना, सवाल तो बिना मेहनत के हल नहीं होते नशीब को भी मगर इम्तहान मे रखना
A littlie bird in the sky. Dropping shit into your eyes. But u don’t cry, You give thank to god because cow is don’t fly.
इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है, नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है।
एक चिनगारी कही से ढूँढ लाओ दोस्तों, इस दिए में तेल से भीगी हुई बाती तो है।
एक खंडहर के हृदय-सी, एक जंगली फूल-सी, आदमी की पीर गूंगी ही सही, गाती तो है।
एक चादर साँझ ने सारे नगर पर डाल दी, यह अंधेरे की सड़क उस भोर तक जाती तो है।
निर्वचन मैदान में लेटी हुई है जो नदी, पत्थरों से, ओट में जा-जाके बतियाती तो है।
दुख नहीं कोई कि अब उपलब्धियों के नाम पर, और कुछ हो या न हो, आकाश-सी छाती तो है।
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