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Poem that describe Rajasthan beautifully

ऊँचा-ऊँचा धोरा अठै, लाम्बो रेगिस्तान।
कोसां कोस रुंख कोनी, तपतो राजस्थान।।
 
फोगला अर कैर अठै, करै भौम पर राज।
गोडावण रा जोङा अठै, मरुधर रा ताज।।

कुंवा रो खारो पाणी, पीवै भैत मिनख।
मेह रो पालर पाणी, ब्होत जुगत सूं रख।।

कोरी कोरी टीबङी, उङै रेत असमान।
सणसणाट यूं बाज रही, जणुं सरगम रा गीत।।

सोनै ज्यूं चमके रेत, चाँदनी रातां में।
रेत री महिमा गावै, चारण आपरी बातां में।।

इटकण मिटकण दही चटोकण, खेलै बाल गोपाल अठै।
गुल्ली डंडा खेल प्यारा, कुरां कुरां और कठै।।

अरावली रा डोंगर ऊंचा, आबू शान मेवाङ री।
चम्बल घाटी तिस मिटावै, माही जान मारवाङ री।।

हवेलियाँ निरखो शेखावाटी री, जयपुर में हवामहल।
चित्तौङ रा दुर्ग निरखो, डीग रा निरखो जलमहल।।

संगमरमर बखान करै, भौम री सांची बात।
ऊजळै देश री ऊजळी माटी, परखी जांची बात।।

धोरा देखो थार रा, कोर निकळी धोरां री।
रेत चालै पाणी ज्यूं, पून चालै जोरां री।।

भूली चूकी मेह होवै, बाजरा ग्वार उपजावै।
मोठ मूँग पल्लै पङे तो, सगळा कांख बजावै।।

पुष्कर रो जग में नाम, मेहन्दीपुर भी नाम कमावै।
अजमेर आवै सगळा धर्मी, रुणेचा जातरु पैदल जावै।।

रोहिङै रा फूल भावै, रोहिङो खेतां री शान।
खेजङी सूँ याद आवै, अमृता बाई रो बलिदान।।

सोने री धरती अठै, चांदी रो असमान।
रंग रंगीलो रस भरियो, ओ म्हारो राजस्थान।।

रंग-रंगीलो राजस्थान, नाज करै है देस।
न्यारी-न्यारी बोली अठैगी, न्यारा-न्यारा भेस।।

राणा जेङो वीर अठै, राजस्थान री शान।
जयपुर जेङो नगर अठै, सैलानियां री जान।।

अरावली पर्वत ऊंचा घणा, कांई म्हे करां बखान।
राजकनाळ लाम्बी घणी, मरुधर रो वरदान।।

चेतक तुरंग हठीलो घणो, भामाशाह महादानी।
सांगा हिन्दू लाज बचावणा, जौहर पद्मण रानी।।

ढोला मरवण प्रेम कहाणी, गावै कवि सुजान।
आल्हा ऊदल वीर कहाणी, चारण करै बखान।।

जैपुर कोटा अर् बीकाणा, जग में मान बढावै।
अलवर उदैपुर जोधाणा भी, राजस्थान री शान कहावै।।

गोगामेङी गोगो धुकै, रुणेचा रामदेव जी।
सालासर हनुमानजी बैठ्या, कोळू पाबूदेव जी।।

पल्लु में काळका माता, देशनोक में माँ करणी।
सुन्धा परबत री सुन्धा माता, तीनूं लोक दुख हरणी।।

राठी गौ री शान प्यारी, बैल नागौरी चोखा घणा।
नसल ऊंट री एक जाणी, बीकाणै में जो नाचणा।।

घूमर घालै गोरियां, माणस बजावै चंग।
होळी खेलै देवर भाभी, उङै कसूमल रंग।।

जयपुर में गणगौर सवारी, राजसी ठाठ दिखावै।
दशहरो मेळो कोटा रो, धरमी मान बढावै।।

साफा अठै जोधपुर रा, परदेशां कीर्ति बखाणै।
मोचङी भी न्यारी-न्यारी, देशोदेश जाणै।।Read Details

कौन करेगा मेरे राजस्थान की

कौन करेगा मेरे राजस्थान की बराबरी?
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होलेण्ड जितने बच्चे तो
सैकैण्ड्री मे फेल हो जाते हैं!
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पोलेण्ड की पोपुलेशन से ज्यादा
कच्छे सेल हो जाते हैं!
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राजस्थान दुबई से दो गुणा और
नार्वे से चार गुणा बङा है!
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आस्ट्रिया से आठ गुणा
स्वीडन से साठ गुणा बडा है!
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बरमूडा, जर्शी, जाम्बिया और
टाँगो से बहुत बङा है!
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मेक्सिको से जस्ट आगे
ब्राजील के पीछे खडा है!
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आई मीन दुनिया के
आधे से ज्यादा देशों से बडा है!
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सम्पूर्ण विश्व के मानचित्र पर
त्याग और तपस्या का
एक गौरवशाली इतिहास लेकर खडा है।
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जिसकी बलिदानी गाथा गाना
किसी कवि के वश की बात नहीं।
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हल्दीधाटी पर कलम चले,
यह कविता की औकात नहीं!
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यूँ घास की रोटी
किसी ग्रंथ पर लिखना भी समझौता है।
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जौहर की ज्वाला कागज पर
यह आगजनी को न्यौता है।
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कैशरिया लिपी वीरों की,
जहाँ रक्तिम वर्ण तराशा है।
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बाँकडली मूँछे सिर्फ समझती,
तलवारों की भाषा है।
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सिर्फ मौत का वरण यहाँ
मनहरण छंद कहलाता है।
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हर जख्म यहाँ पर अलँकार
बलिदान बंध कहलाता है।
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विशेष व्याकरण वीरों का,
है शब्द कोष मे केवल जय!
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विराम चिन्ह सिर शत्रु के,
प्रत्यय का मतलब है प्रलय!
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संधि ना सीखी सपने में और
समास द्वंद्व के सीखे हैं!
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शुद्धि सदा वचन की और
पर्याय युध्द के लिखे हैं!
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पन्ना पर पन्ना कौन भरे,
स्याही से चन्दन कौन लिखे!
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बिन कलम झुकाये महाराणा का
अभिनन्दन कौन लिखे!
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मीरां की श्रद्धा कौन लिखे!
हाङा की निष्ठा कौन लिखे!
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हठ हम्मीर, दुर्गा-साँगा की
प्राण प्रतिष्ठा कौन लिखे!
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कौन लिखे गौरा बादल!
कौन लिखे सैनिक का शव!
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कौन लिखे शैतान सिंह और
कौन लिखे जेपी यादव!
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चेतावनी के चुँगटियो से चेत गया
वो राजस्थान !
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शेरशाह को मुठ्ठी बाजरा रेत गया
वो राजस्थान !
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चार बाँस चोबीस गज से भेद गया
वो राजस्थान !
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पीथल रा आखर राणा का मन छेद गया
वो राजस्थान! Jai ho mere rangeele rajasthan
ki.Read Details