Rajasthani poems Wishes And Messages, Rajasthani poems WhatsApp Picture Sticker

केसरिया बालम आओ नि पधारो म्हारे देस

आंबा मीठी आमरी,
 (आम से भी मीठी ईमली.)
चोसर मीठी छाछ.
 (और सबसे मीठी छाछ)
आ..अलाप
 नैना मीठी कामरी
(सुंदर आँखो वाली कामिनी)
रन मीठी तलवार
(और युध में प्रिय तलवार..)
पधारो म्हारे देस, आओ म्हारे देस नि
 केसरिया बालम आओ नि पधारो म्हारे देस
 पधारो म्हारे देस, आओ म्हारे देस जी
 केसरिया बालम आओ नि पधारो म्हारे देस

पधारो बीकानेर।।। केसरियाबालम आओ नि पधारो म्हारे देसRead Details

satire on modern System in Rajasthani

दूध दही ने चाय चाटगी, फूट चाटगी भायाँ ने
इंटरनेट डाक ने चरगी, भैंस्या चरगी गायाँ ने

टेलीफून मोबाईल चरग्या, नरसां चरगी दायाँ ने
देखो मर्दों फैसन फटको, चरग्यो लोग लुगायाँ ने

साड़ी ने सल्वारां खगी, धोतीने पतलून खायगी
धर्मशाल ने होटल खागी, नायाँ ने सैलून खायगी

ऑफिस ने कम्प्यूटर खाग्या, 'मागी' चावल चून खायगी
कुवे भांग पड़ी है सगळे, सब ने पछुवा पून खायगी

राग रागनी फिल्मा खागी, 'सीडी' खागी गाणे ने
टेलीविज़न सबने खाग्यो, गाणे ओर बजाणे ने

गोबर खाद यूरिया खागी, गैस खायगी छाणे ने
पुरसगारा ने बेटर खाग्या, 'बफ्फे' खागी खाणे ने

चिलम तमाखू हुक्को खागी, जरदो खाग्यो बीड़ी ने
बच्या खुच्यां ने पुड़िया खाग्या, खाग्या साद फकीरी ने

गोरमिंट चोआनी खागी, हाथी खाग्यो कीड़ी ने
राजनीती घर घर ने खागी, भीड़ी खाग्यो भीड़ी ने

हिंदी ने अंग्रेजी खागी, भरग्या भ्रस्ट ठिकाणे में
नदी नीर ने कचरो खाग्यो, रेत गई रेठाणे में

धरती ने धिंगान्या खाग्या, पुलिस खायरी थाणे में
दिल्ली में झाड़ू सी फिरगी, सार नहीं समझाणे में

ढाणी ने सेठाणी खागी, सहर खायग्यो गांवां ने
मंहगाई सगळां ने खागी, देख्या सुण्या न घावां ने

अहंकार अपणायत खागी, बेटा खाग्या मावां ने
भावुक बन कविताई खागी, 'भावुक' थारा भावां नेRead Details

काली कलायन ऊमटे जद

जय जय राजस्थान
----------------

माथे बोर, नाक में नथनी, नोसर हार गलै में जी,
झाला, झुमरी, टीडी भलको, हाथा में हथफूल जी |
टूसी, बिंदी, बोर, सांकली, कर्ण फूल काना में जी,
कंदोरो, बाजूबंद सोवे, रुण-झुण बाजे पायल जी |
रंग रंगीलो सबसे प्यारो म्हारो राजस्थान जी ।


रसमलाई, राजभोग औ कलाकंद, खुरमाणी जी,
कतली, चमचम, चंद्रकला औ मीठी बालूशाही जी |
रसगुल्ला, गुलाब जामुन औ प्यारी खीर-जलेबी जी,
दाल चूरमो , घी और बाटी सगला रे मन भावे जी |
रंग रंगीलो सबसे प्यारो म्हारो राजस्थान जी ।


कांजी बड़ा दाल को सीरो, केर-सांगरी साग जी,
मोगर, पापड़, दही बड़ा औ नमकीन गट्टा भात जी |
तली ग्वारफली और पापड़, केरिया रो अचार जी,
घणे चाव से बणे रसोई, कर मनवार जिमावे जी |
रंग रंगीलो सबसे प्यारो म्हारो राजस्थान जी ।


काली कलायन ऊमटे जद, बोलण लागे मौर जी,
बिरखा के आवण री बेला, चिड़ी नहावे रेत जी |
खड़ी खेत के बीच मिजाजण , कजरी गावे जी,
बादीलो घर आसी कामण , मेडी उड़ावे काग जी |
रंग रंगीलो सबसे प्यारो म्हारो राजस्थान जी ।Read Details

Son Cheedi bhai Son Chidi

सोन चिड़ी भई सोन चिड़ी,
सौ-सौ घोड़ा लेय उड़ी

एक घोड़ो आरंपार,
बीच में बैठा मियां किलार

मियां किलार रे काळी टोपी,
काळा है क्रिसण जी,
गोरा है मुकन जी

चोटी झाली चांदजी,
जीत गिया हड़मोन जी

हड़मोनजी रे पाय लागूं,
हाथ जोड़ बिदिया मांगू 

एक बिदिया खोटी,
गुरजी झाली चोटी

ले बांदरा रोटी,
थारी मां चोटी

चोटी करै चम-चम,
बिदिया आवै घम-घम

Read Details

कन्या मान्य कुर्र ... चालो जोधपुर

कन्या मान्य कुर्र ...
चालो जोधपुर ..
जोधपुर रा कबूतरा रे उडे रे फुर्र फुर्र 
रे भाई मोटर बोली घुर्र ...
छोरा बोलिया हुर्र...
लागे रे गंडकड़ा मोटर पाछै ..
कन्ह्यो बोलियों हुर्र ...
रे भैई कान्या रे मान्या ..मान्या रे कान्या कुर्रर्रर्रर्रर्रर्रRead Details

धुर्र बिन हाथ लगाया दरद जाणग्या परची

धुर्र

बिन हाथ लगाया दरद जाणग्या
परची मोटी करी तय्यार
जाँच कराई बार लेब सूँ
रपट पढी ना एक भी बार
सात-आठ एक गोळ्याँ लिख दी
पीवण री शीश्याँ दी चार
ठीक हुयो तो महिमा थाँरी
मरग्यो तो मालिक री मार
अजब लगावो मजमो थाँरी धुर्र बोलूँ
थाँने डाकटर बतळाऊँ या मदारी बोलूँRead Details

कुण जाणे किण टेम बदल्ज्या,कोड़ी

कुण जाणे किण टेम बदल्ज्या,
कोड़ी एक छदाम रो ,
मन घोड़ो बिना लगाम रो,

काया ने घर में पटक झटक, घूमै मौजी असमाना में ,
... कुबदी लाखों उत्पात करे, सूतै रे धरज्या कानां में,
महं ढूंढूं बाग़ बगीचा में, ओ छाने राख़ मसाणां में,
हैरान करे काया कल्पे, लाधै नी पलक ठिकाणा में ,
दोड़े हङबङ दङबङ करतो,
है भूखो ख़ाली नाम रो,
मन घोड़ो बिना लगाम रो,
-
प्रस्तुतकर्ता डॉ. Ramgopal JatRead Details

कान्यां रे मान्या कुर्र चालो जोधपुर जोधपुर

कान्यां रे मान्या कुर्र
चालो जोधपुर
जोधपुर का कबूतरां रे उड़ता फुर्र फुर्र !
रै भाई झालर बाजी हुर्र
कान्या रे मान्या 
मान्या रे कान्यां कुर्र
मोटर चाली घुर्र
लारै गिँडकड़ा घुर्र
म्हारै लाल नै
दूध पियाऊं गर मर मर्र
रै झालर बाजी झुर्र
कान्या रे मान्या 
मान्या रे कान्या कुर्र !Read Details

prem ro parwat, roop ro

prem ro parwat, roop ro jharno
chokho lagai, athai thaharno!
katil aankhyan, bojhal saansaa
khud par hee sharmano marno!
meghaan rai kheene aanchal me
chandarle ro lukano-chipano!
jhurmut me mhe aankhyan me the
baat-baat par roothno-manano!
ek nasho hai aa pritadlee
jo naa sikhyo kadai utarno!
Ratan Jain, Parihara Read Details

राजस्थान री, रहियां राजस्थान। राजस्थानी रै

राजस्थान री, रहियां राजस्थान।
राजस्थानी रै बिना, थोथो मान 'गुमान'॥
आढो दुरसौ अखौ, ठाढ़ा कवि टणकेल।
भासा बिना न पांगरै, साहित वाळी बेल॥
पीथल बीकाणै पुर्णा, जाणै सकल जिहान।
पातल नै पत्री पठा, गहर करायौ ग्यान॥
सबद बाण पीथल लगै, मन महाराणा मोद।
अकबर दल आयो अड़ण, हलदी घाट सीसोद॥
धर बांकी बांका अनड़, वांका नर अर नार।
इण धरती रा ऊपना, प्रिथमी रा सिंणगार॥
धन धरती धन ध्रंगड़ो, धन धन धणी धिणाप।
धन मारु धर धींगड़ा, जपै जगत ज्यां जाप॥
रचदे मेहंदी राचणी, नायण रण मुख नाह।
जीतां जंग बधावस्यां, ढहियां तन संग दाह॥
नरपुर लग निभवै नहीं, आज काल री प्रीत।
सुरपुर तक पाळी सखी, प्रेम तणी प्रतीत॥
मायड़ भासा मान सूं, प्रांत तणी पहिचांण।
भासा में ईज मिलैह, आण काण ऒळखांण॥
मायड़ भासा जाण बिण, गूंगो ग्यान 'गुमान'।
तीजा गवरा होळीका, हुवै प्रांत पहिचांन॥
भाइ बीज राखी बंधण, गीत भात अर बान।
बनौ विन्याक कामण्या, विण भासा न बखान॥Read Details

मानसरोवर सूं उड़ हंसौ, मरुथळ

मानसरोवर सूं उड़ हंसौ, मरुथळ मांही आयौ
धोरां री धरती नै पंछी, देख-देख चकरायौ

धूळ उड़ै अर लूंवा बाजै, आ धरती अणजाणी
वन-विरछां री बात न पूछौ, ना पिवण नै पाणी

दूर नीम री डाळी माथै, मोर निजर में आयौ,
हंसौ उड़कर गयौ मोर नै, मन रौ भेद बतायौ

अरे बावळा, अठै पड़्यौ क्यूं, बिरथा जलम गमावै
मानसरोवर चालर भाया, क्यूं ना सुख सरसावै

मोती-वरणौ निरमळ पाणी, अर विरछां री छाया
रोम-रोम नै तिरपत करसी, वनदेवी री माया

साची थारी बात सुरंगी, सुण सरसावै काया
जलम-भोम सगळा नै सुगणी, प्यारी लागै भाया

मरुधर रौ रस ना जाणै थूं, मानसरोवर वासी
ऊंडै पाणी रौ गुण न्यारौ, भोळा वचन-विलासी

दूजी डाळी बैठ्यौ विखधर, निजर हंस रै आयौ
सांप-सांप करतौ उड़ चाल्यौ, अंबर में घबरायौ

मोर उतावळ करी सांप पर, करड़ी चूंच चलाई
विखधर री सगळी काया नै, टुकड़ा कर गटकाई

अब हंस नै ठाह पड़ी आ, मोरां सूं मतवाळी
मानसरोवर सूं हद ऊंची, धरती धोरां वाळीRead Details