Shayari poems Wishes And Message, Shayari poems WhatsApp Picture Sticker

A shayari on politics, politician, life of general

*सुना है प्रदेश के मंजर बदले हैं* 
*कातिल वही बस खंजर बदले हैं*

*हुकुमत रंगमंच है सियासत का* 
*टोपियां वही केवल सर बदले हैं*

*परिंदे ...ब भी कैद है ख्यालों में* 
*कभी पिंजरे कभी पर बदले हैं* 

*गांवो में भी कहां हैं बो दिली सुकूं* 
*झूठ कहते थे कि  शहर बदले है* 

*बडी नासाज रहने लगी है तबीयत* 
*हमने दवा के बहाने जहर बदले हैं* ..


ख़्वाबों को ...भी-...भी आइना दिखाया है मैंने ,
आसमाँ से, शुक्र है, ज़मीं पर लौट आये हैं वोह !!


*बुलन्दियों को पाने की ख्वाहिश तो बहुत थी,*
*लेकिन दूसरो को रौंदने का हुनर कहां से लाता !!*

Hindi anchoring quotes shayariya collection

बात-बात पर हँस देना है , कदम-कदम  मुस्काना है ,
हमको खुशियों के पौधों को यूँ ही रोज लगाना है " ! 😊🙏

सिर्फ आवाज और लफ़्ज़ ही नहीं,,,,,,,, 
मेरी खामोशी भी तुम्हीं को ढूंढती है,,,,,,,

Quote on love, mohabbat, ishq
हौंसलों को मेरे जो रवानी दे दी, उनकी भीनी सी मुस्कान ने ..
आग़ोश में ले लिया मुझ परिंदे को, मोहब्बत के आसमान ने  !

थाम लेना हाथ मेरा कभी पीछे जो छूट जाऊँ
              मना लेना मुझे जो कभी तुमसे रूठ जाऊँ
मैं पागल ही सही मगर मैं वो हूँ
               जो तेरी हर आरजू के लिये टूट जाऊँ..,,

Few sattire on Chaplusi
नफ़रत को ज़ेहन से निकाल के रखिये,
इन्सानियत, मिजाज़ में ढाल के रखिये,
चापलूसी वरना खो देगी वजूद तुम्हारा,
नायाब है ग़ैरत थोड़ा सँभाल के रखिये!!

ना तेरी है ना मेरी है
ये वक़्त की हेराफेरी है
तूँ सेर समझता है ख़ुद को
पर आवाम पंसेरी है


Motivational quotes
हौंसलों को मेरे जो रवानी दे दी, उनकी भीनी सी मुस्कान ने ..
आग़ोश में ले लिया मुझ परिंदे को, मोहब्बत के आसमान ने  !


जिन्दगी की तपिश को सहन किजिए!
...क्सर वे पौधे मुरझा जाते हैं. ... जिनकी परवरिश छाया में होती है..!!

Andaaz, manzil, thinking, desires
"...ंदाज़ कुछ ...लग ही मेरे सोचने का है,
सब को मंज़िल का है शौख मुझे रास्ते का है"


बुलंदी की उडान पर हो तो जरा सब्र रखो 
परिंदे बताते हैं कि आसमान में ठिकाने नही होते

क़ाफ़िले तो बेइन्तेहा थे शहर में पर कोई हमसफ़र न मिला,
जुस्तजू शिद्दत से थी किसी ...पने की पर कोई घर न मिला!

ख़ता मेरी है ...गर तो रूबरू कह ले मेरे,
बाज़ार तो रुसवा कर देगा दोस्ती हमारी!

ना हारना ,ना टुटना,
दौर गर्दिशी का भी गुजर जाएगा,
हो चाहे कांटो क़दम में कितने ही,
बनके गुलाब तू हंसाना खिलना,
इंतेहा तो है पहचान हौसलों की,
देख ...ंधेरे के बाद ही तो है रोनके उजालों की,
जिद जीत की रखना ,
ना तू कभी बिखरना ।।

Two lines for friendship, dosti inspiration

ख़ुशनुमा रंग कई, ज़िंदगी की बयार में है,
मुस्कुरा, दोस्त, वक़्त तेरे ही इंतज़ार में है!


जलाओ वो समा जिसे आंधी बुझा न सके💪🏻 
ओर बनो वो चेहरा जिसे जमाना मिटा न सके.!!✌

इल्तेजा मेरी ख़ामोशियों की, इतनी तो मानिए,
हर ख़याल है नाम तेरे, ज़रा रूह से पहचानिए!!


Two lines shaayri on those moved another city to earn bread & butter

मसरूफ़ हूँ, ख़ुद से दूर जाकर भी,
जद्दो-जहद ये, निवालों के लिए है!

कहां पर क्या हारना है ये जज्बात जिसके ...ंदर है 
फिर दुनियाँ चाहे कूछ भी समझे पर वो सिकंदर है

तू कर दिल से इबादत खुद की मानस
मैंने सुना है हर बंदे में खुदा होता है

नजरो से आकाश सौंप दिया मनुहारो से सृष्टि
जाने क्या कह गई उसकी याचक दृष्टि 
संकुचाए से सम्बोधन में उसका स्नेह पुकारे 
कोई मुझको मांगे मुझसे दोनो हाथ पसारे

*फलदार पेड़ और गुणवान व्यक्ति ही झुकते हैं, 
सूखा पेड़ और मूर्ख व्यक्ति कभी नहीं झुकते, 
कदर किरदार की होती है, 
वरना कद में तो साया भी इंसान से बड़ा होता है*

Four lines for poor by money

Anchoring lines for bad times, poor time, sandesh, 

मैं तो ग़ज़ल सुना के ...केला खड़ा रहा,
सब ...पने ...पने चाहने वालों में खो गए …

तन्हा तो हूँ पर ग़ैरतमन्द हूँ, तौबा शिकन है जी हुज़ूर,
वक़्त आपका है आज, वक़्त मेरा भी बदलेगा ज़रूर!!

मुझ जैसे आते गए, मेरी ख़ामोशियों के दायरे में,
आदमी से इंसां होने की छोटी से क़वायद थी ये।

शर्मो-हया, ज़मीर, ईमान, ताक़ पर रख दिये सब,
...दबी शहर किस तरह बेलिबास हो गया है मेरा!

मख़मलों के  न  ये  बिछोने दो |
मुझको यारो ज़मीं  पे  सोने दो ||
ऐसे आती है नींद मुफ़लिस को |
मुझको एहसास ये  भी होने दो ||
*"*"*"*"*"*"*"*"*"*"*"*"*"*"*"
सय्यद 'क़ासिम' ...ली बीकानेरी

मुस्कुराते इंसान की कभी जेबें टटोलना,
हो सकता है उसका रूमाल गीला मिले।

🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

*भीतर क्षमा हो, तो क्षमा निकलेगी..*
*भीतर क्रोध हो, तो क्रोध निकलेगा..*

*भीतर प्रार्थना हो, तो प्रार्थना निकलेगी..*
*भीतर नफरत हो, तो नफरत निकलेगी..*

*भीतर भक्ति हैं तो भक्ति ही निकलेगी*
*भीतर ज्ञान ...म्रत हैं तो ज्ञान रूपी ...म्रत ही निकलेगा*

*भीतर ईर्ष्या ,द्वैष,...हंकार रूपी गन्दगी भरी हैं तो गन्दगी ही निकलेगी*

*इसलिए जब भी कुछ बाहर निकले,*
*तो दूसरे को दोषी मत ठहराना,*

*यह हमारी ही संपदा है जिसको*
*हम ...पने भीतर छिपाए बैठे  हैं।*

बुरा करने का विचार आए तो कल पर टालो, 
...च्छा करने का विचार आए तो 
आज और ...भी  ही कर डालो!

जिन्दगी में ऊंचा उठने के लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं, 
...च्छे शब्द इंसान को बादशाह बना देते है। 
जो इन्सान ...च्छे विचार और ...च्छे संस्कार को पकड़ लेता है, 
फिर उसे हाथ में माला पकड़ने को जरूरत नहीं होती।

दिली तमन्ना यही है कि कोई हँसे हम पर भी,
किसी तरह तो किसी को ख़ुशी दे पाएँ हम!!


*परख से कब जाहिर हुई*
*शख्सियत किसी की...*
*हम तो बस उन्हीं के हैं,*
*जिन्हें हम पर यकीन है...*

Shayari on positivities

उन्हीं से उजालों की उम्मीद है
दिए आँधियों में जो जलते रहे

उन्हीं को मिलीं सारी ऊचाईयां
जो गिरते रहे और संभलते रहे

छुपाता रहा बाप मजबूरियां
खिलौनों पर बच्चे मचलते रहे


इतनी तो इनायत, दोस्त मेरे, मेरी नज़र करना..
मिल जाऊँ राह में गर कहीं, मुझे ख़बर करना!!

Ilzaam ab ki baar bhi kismat ke sir gaya

यूँ देखिए तो आँधी में बस इक शजर गया 
लेकिन न जाने कितने परिंदों का घर गया

जैसे ग़लत पते पे चला आए कोई शख़्स 
सुख ऐसे मेरे दर पे रुका और गुज़र गया

मैं ही सबब था ...ब के भी ...पनी शिकस्त का 
इल्ज़ाम ...ब की बार भी क़िस्मत के सर गया

.........राजेश रेड्डी


खुश रहना सीखिए बाकी सब चलता रहेगा 
कोई ...पना बिछड़ता रहेगा कोई पराया मिलता रहेगा

आशावादी व्यक्ति हर आपदा में एक ...वसर देखता है; 
निराशावादी व्यक्ति हर ...वसर में एक आपदा देखता है।”

Shaayari for the life, motivational, happiness

सुनो हंसी के लिए गुदगुदाना पड़ता है
चराग जलता नहीं जलाना पड़ता है

क़लन्दरी भी तो हिस्सा है बादशाही का
ज़नाब ! बीच में लेकिन खज़ाना पड़ता है

मिलेगी मिटटी से एक दिन हमारी मिटटी भी
...भी ज़मीं पे क्या क्या बिछाना पड़ता है

मुशायरा भी तमाशा मदार शाह का है
यहाँ हर एक को करतब दिखाना पड़ता है

ये कौन कहता है इनकार करना मुश्किल है
मगर ज़मीर को थोडा जगाना पड़ता है

न तुम हो न तेरी याद ही हैं दिल में,
...रसे बाद नींद के इमकान हैं ...ब!!

उनको ये शिकायत है.. मैं

उनको ये शिकायत है.. मैं बेवफ़ाई पे नही लिखता,
और मैं सोचता हूँ कि मैं उनकी रुसवाई पे नही लिखता.'

'ख़ुद अपने से ज़्यादा बुरा, ज़माने में कौन है ??
मैं इसलिए औरों की.. बुराई पे नही लिखता.'

'कुछ तो आदत से मज़बूर हैं और कुछ फ़ितरतों की पसंद है ,
ज़ख़्म कितने भी गहरे हों?? मैं उनकी दुहाई पे नही लिखता.'

'दुनिया का क्या है हर हाल में, इल्ज़ाम लगाती है,
वरना क्या बात?? कि मैं कुछ अपनी.. सफ़ाई पे नही लिखता.'

'शान-ए-अमीरी पे करू कुछ अर्ज़.. मगर एक रुकावट है,
मेरे उसूल, मैं गुनाहों की.. कमाई पे नही लिखता.'

'उसकी ताक़त का नशा.. "मंत्र और कलमे" में बराबर है !!
मेरे दोस्तों!! मैं मज़हब की, लड़ाई पे नही लिखता.'

'समंदर को परखने का मेरा, नज़रिया ही अलग है यारों!!
मिज़ाज़ों पे लिखता हूँ मैं उसकी.. गहराई पे नही लिखता.'

'पराए दर्द को , मैं ग़ज़लों में महसूस करता हूँ ,
ये सच है मैं शज़र से फल की, जुदाई पे नही लिखता.'

'तजुर्बा तेरी मोहब्बत का'.. ना लिखने की वजह बस ये!!
क़ि 'शायर' इश्क़ में ख़ुद अपनी, तबाही पे नही लिखता...

शायर नामालूम

कभी रस्ते में मिल जाओ तो

कभी रस्ते में मिल जाओ
तो कतरा के गुज़र जाना,
हमें इस तरह तकना
जैसे पहचाना नहीं तुमने!
हमारा ज़िक्र जब आये
तो यूँ अनजान बन जाना,
कि नाम सुन कर भी
हमें जाना नहीं तुमने!!

~स्व.साहिर लुधियानवी

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमाँ, लेकिन फिर भी कम निकले

डरे क्यों मेरा कातिल क्या रहेगा उसकी गर्दन पर
वो खून जो चश्म-ऐ-तर से उम्र भर यूं दम-ब-दम निकले

निकलना खुल्द से आदम का सुनते आये हैं लेकिन
बहुत बे-आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले

भ्रम खुल जाये जालीम तेरे कामत कि दराजी का
अगर इस तुर्रा-ए-पुरपेच-ओ-खम का पेच-ओ-खम निकले

मगर लिखवाये कोई उसको खत तो हमसे लिखवाये
हुई सुबह और घर से कान पर रखकर कलम निकले

हुई इस दौर में मनसूब मुझसे बादा-आशामी
फिर आया वो जमाना जो जहाँ से जाम-ए-जम निकले

हुई जिनसे तव्वको खस्तगी की दाद पाने की
वो हमसे भी ज्यादा खस्ता-ए-तेग-ए-सितम निकले

मुहब्बत में नहीं है फ़र्क जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफिर पे दम निकले

जरा कर जोर सिने पर कि तीर-ऐ-पुरसितम निकले
जो वो निकले तो दिल निकले, जो दिल निकले तो दम निकले

एक ऐसा गीत गाना चाह्ता

एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं, मैं..
खुशी हो या गम, बस मुस्कुराना चाह्ता हूं, मैं..

दोस्तॊं से दोस्ती तो हर कोई निभाता है..
दुश्मनों को भी अपना दोस्त बनाना चाहता हूं, मैं..

जो हम उडे ऊचाई पे अकेले, तो क्या नया किया..
साथ मे हर किसी के पंख फ़ैलाना चाह्ता हूं, मैं..

वोह सोचते हैं कि मैं अकेला हूं उन्के बिना..
तन्हाई साथ है मेरे, इतना बताना चाह्ता हूं..

ए खुदा, तमन्ना बस इतनी सी है.. कबूल करना..
मुस्कुराते हुए ही तेरे पास आना चाह्ता हूं, मैं..

बस खुशी हो हर पल, और मेहकें येह गुल्शन सारा "अभी"..
हर किसी के गम को, अपना बनाना चाह्ता हूं, मैं..

एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं, मैं..
खुशी हो या गम, बस तेरी ख़ुशी चाहता हूँ ***

..Mila kya dost Teri dosti

..Mila kya dost Teri dosti se ..
Hue mehrum duniya ki her Khusi se,

Chaman aisa Jalaya bijliyo ne,
..Sehem jaate hai ab Roshniyo se,

Hume jisne mitaya VO kaha hai.....!
Yahi puchte hai her Kisi se,

Jine apna samjhte teh abhi tak..
Nazar aaye VO bhi ajnabi se,

Vafao per Dua de raha hu..
Banavat se nahi Khusi se,

Tumhe Bhul ker ji to lenge..
Magar ye dekhna Kis Bebasi se.....

Jaha bikhri thi Khavaabe rangi..
Vo dar choada hai kitni Bebasi se, 

Kabhi to ye Hakkikat jaan logi ..
Tumhe chaha tha Humne Sadgi se,

Na jab koi tumhare paas hoga Bahut yaad aaygi MERI KAMI SE .. "

दिलों में दर्द लब पे

दिलों में दर्द लब पे तश्न्गी है यहाँ 
जिन्दगी कुछ भी नही सिर्फ़ बेबसी है यंहा 
शोर है भीड़ है हंगामा कत्लेआम के बीच 
तुम्हारी साँस अभी है यही खुशी है यहाँ 
वो बात झूठी थी जो मैं एलान किया करता था 
फकत जो तू कहे-बोले वही सही है यहाँ 
कोई तो हद हो और कितना दर्द पी जायें 
तमाम गम है और तनहा आदमी है यहाँ 
मैं एक रोज मोहब्बत भी करके देखूंगा 
सुना है दिल का लगाना भी दिल्लगी है यहाँ 



हमारे गम से वो गाफिल नही हैं फ़िर भी बसर 




कभी जो पूछे तो कहना हंसी खुशी है यहाँ

खून अपना हो या पराया

खून अपना हो या पराया हो 
नस्ल ए आदम का खून है आख़िर 
जंग मशरिक में हो या मग़रिब में 
अमन ए आलम का खून है आख़िर 
टैंक आगे बढ़ें या पीछे हटें
कोख धरती की बाँझ होती है 
फ़तहे का जश्न हो या हार का सोग 
जिंदिगी मैयतों पे रोती है 
जंग तो ख़ुद ही एक मसला है 
जंग क्या मसअलों का हल देगी 
खून ओर आग आज बरसेगी 
भूख ओर एहतियाज कल देगी 
इसलिए ए शरीफ इंसानों 
जंग टलती रहे तो बेहतर है 
आप ओर हम सभी के आँगन में 
शम्मा जलती रहे तो बेहतर है 

साहिर लुधयान्वी

Moor ker na dekh mujhe,

Moor ker na dekh mujhe, yoon hanstay hanstay,
Mere dost hain baray hoshiyaar, keh dengay bhabhi Namaste.

Dil do to kisi ek

Dil do to kisi ek ko,
Aur do to kisi nek ko...
Jo samjhe pyaar ke matlab ko..
Jab tak saccha dildar na mile, try karte raho har ek ko.

Judai apki rulati rahegi, yaad apki

Judai apki rulati rahegi,
yaad apki aati rahegi,
pal pal jaan jati rahegi,
jab tak jism mein hai jaan har saans ye rishta nibhati rahegi

Tere naal dosti akhri sah

Tere naal dosti akhri sah tak nibawange,
Tere pairan thalle assi ta talliyaan tikaawange,
Jado marzi parakh lai mere dosta,
Teri mashuk asi phasavange.

Yaad teri wich saanu chain

Yaad teri wich saanu chain koi na, Saade utte tenu reham koi na, Horan nu tu din raat SMS kare, saade leyi tere kol time koi naa.

Meri ankho ko sapne fir

Meri ankho ko sapne fir dikha gaya koi, buzhti sason me mahak fir jaga gaya koi, kya ye sachmuch pyar hai, ya Chutiya fir se bana gaya koi.

Kise-kise mutiyar de hai sir

Kise-kise mutiyar de hai sir utte palla,
PAGG wala munda dise dasan vicho kalla,
Jeanan chall payian suitan da riwaaz na riha, 
Mera pehlan varga rangla Punjab na reha.

Asin jitte bazi tan mashoor

Asin jitte bazi tan mashoor ho gaye,
Tere haseyan ch hase tan hanju door ho gaye,
Bas ik tere jehe dost di dosti badoult,
Asin tutte kach ton KHINR ho gaye

Zindagi de 4 din hass

Zindagi de 4 din hass khed k katt lo,
Pyar naal duniya ch khatna jo khat lo,
Lutt lo nazara jag wale mele da,
Pata nahio hunda yaaro aun wale wele da... Enjoy!

Raaz dil ka dil mein

Raaz dil ka dil mein chupate hai woh,
Samne aate hi nazar jhukate hai woh,
Baat karte nahi, ya hoti nahi,
Par shukar hai jab bhi milte hai muskurate hai woh

Na moh na maya hai;

Na moh na maya hai; Aalas tumhi ko aaya hai; Humein bhi msg kar k dekh lo; Nokia/Motorola/Sony ne ye mobile sirf tumhari GIRLFRIEND k liye nahi banaya hai.

Ae kalam ruk ruk ke

Ae kalam ruk ruk ke chal ek adab ka mukaam hai,
teri nok ke neeche mere mehboob ka naam hai

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