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Loktantra fir bhi zinda hai

निगम पार्षद नोट कमाता
एम एल ए विश्वास गँवाता
सांसद अपना शर्मिन्दा है
लोकतन्त्र फिर भी ज़िन्दा है ॥

व्यवसायी हर टैक्स बचाता
अध्यापक ट्यूशन की खाता
पत्रकार इक कारिन्दा है
लोकतन्त्र फिर भी ज़िन्दा है ॥

डाँक्टर भारी लूट मचाता
अभियन्ता अभियान चलाता
बेघर हर इक बाशिन्दा है
लोकतन्त्र फिर भी ज़िन्दा है ॥

है किसान क़िस्मत का मारा
नेताओं में बँटता चारा
रिश्वतख़ोरी ताबिन्दा है
लोकतन्त्र फिर भी ज़िन्दा है ॥

- राजकुमार दायमा 7597740233Read Details

दीये बाती के रिश्ते पर

दीये बाती के रिश्ते पर एतबार लगे है 
उजाले तो है फिर क्यों अंधियार लगे है 

कर दी चमन ने गुलों की बरसात भी 
क्यों अब बिखरे -बिखरे खार लगे है 

रंगीनिया तो दिखाई दे रही हर तरफ 
सूना सूना फिर क्यो ये संसार लगे है 

दे रहे है एक दूजे को विश्वास भरपूर 
धोखाधड़ी होने के क्यों आसार लगे है 

बादल तो घने दिखाई दे रहें आकाश में 
फिर क्यों नहीं बारिश के आसार लगे है 

बाँट तो रहे है लोग खुशियाँ जता जता के 
तनहा फिर क्यों सारे ही घर द्वार लगे हैRead Details