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Eyes tell the truth
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Eyes tell the truth


A very emotional shayari by sheen jald nizaam

जहाँ कल था वहीं फिर आ गया हूँ 
मगर सदियों तलक चलता रहा हूँ। 
.......शीन काफ़ निज़ाम


गम की नदी में उम्र का पानी ठहरा-ठहरा लगता है
ये फिकरा झूठा है लेकिन कितना सच्चा लगता है

जीत के जज्बें ने क्या जाने कैसा रिश्ता जोड़ दिया
जानी दुश्मन भी मुझ को ...ब मेरा ...पना लगता है

‘पापा’ ‘पापा’ कह कर मेरे पास नही आया कोई
आज नही है वो, तो घर भी सहमा सहमा लगता है

चार पलों या चार दिनों में होगा वो महदूद मगर
उम्र के घर में जिस्त का आंगन फैला फैला लगता है

इस बस्ती की बात न पूछो इस बस्ती का कातिल भी
सीधा-सादा, भोला-भाला, प्यारा-प्यारा लगता है

दरवाजें तक छोड़ने मुझ को आज नही आया कोई
बस, इतनी-बात है लेकिन जाने कैसा लगता है
......शीन काफ़ निज़ाम

क्या से क्या समझ लिया तूने, ख़ामोश देख कर मुझे,
सजदे में था मैं तो, ...रे नादाँ, तेरी सलामती के लिए !!

A gazal on life journey

पता ढूंढता हूँ उजालों के घर का ।
मुसाफिर हूँ मै कोई तनहा सफ़र का ।

भले ही फिरूँ बेखबर होके खुद से,
दिवाना हूँ लेकिन तुम्हारी खबर का ।

है रंजो गमों की ये जायजाद मेरी,
शहंशाह हूँ ...पने दिल के नगर का ।

हवाओं के रुख से बता दे ये कोई,
हमे इल्म है आंधियों की गुज़र का ।

कि है नूर उसका ही खुशबू उसी की,
मै इक फूल हूँ उसके दिल के शज़र का ।

ग़ज़ल ये ...गर कोई समझे,
...सर उसपे आ जाए मेरे ...सर का...

ऐसा ही होता है

होता है.... होता है.... 

ऐसा भी होता है 
रोने को कंधा देने वाला 
...क्सर ...केले में रोता है
ओरों को हंसी देने वाला, 
सर तकिये पर रख सोता है, 
नींद से पहले ...क्सर, 
तकिया गीला होता है।

होता है... होता है....
जिन्दगी के खेल में, 
हारने वाले की बात क्या, 
जीतने वाला ...क्सर, 
जीत कर रोता है।
होता है.... होता है...

बचपन से बङा बनना, 
हर किसीका सपना होता है, 
जवानी का ...भिमान, 
बुढापे में रोता है।
होता है... होता है...

मर्म जानलो रोने का, 
जिसके सीने में 
दिल होता है 
केवल वोही रोता है।
होता है..... होता है 

ऐसा ही होता है।

मैं लोगों से .. मुलाक़ातों

मैं लोगों से .. मुलाक़ातों .. के लम्हे याद.. 
रखता हूँ...
मैं बातें .. भूल भी जाऊं .. तो लहज़े याद..  
रखता हूँ ;

सर-ए-महफ़िल निगाहें.. मुझ पे .. 
जिन लोगों की पड़ती हैं ...
निगाहों के .. हवाले से .. वो चेहरे याद.. 
रखता हूँ ;

ज़रा सा हट के.. चलता हूँ ..
 ज़माने की रिवायत से...
के जिन पे बोझ.. मैं डालूँ ..वो कंधे याद.. 
रखता हूँ ;

दोस्ती जिस से की .. उस से .. 
निभाउंगा जी जाँ से...
के मैं दोस्ती के.. हवाले से .. रिश्ते याद..
रखता हूं ;

मैं यूँ तो भूल.. जाता हूँ .. खराशें.. तल्ख़
बातों की ...
मग़र जो ज़ख्म.. गहरे दें वो .. रवैय्ये याद..
रखता हूँ..."

" DARD " Sabhi Insaano Mein

" DARD "

Sabhi Insaano Mein Hai Magar...
Koi Dikhata Hai To... Koi Chhupata Hai...


. " HUMSAFAR "

Sabhi Hai... Magar...
Koi Saath Deta Hai... To...
Koi Chhod Deta Hai...



" PYAR "

Sabhi Karte Hai...Magar...
Koi Dil Se Karta Hai... To...
Koi Dimag Se Karta Hai...



" DOSTI "

Sabhi Karte Hai... Magar...
Kuch Log Nibhate Hai... aur
Kuch Log Aazmate Hai...

. " RISHTA "

Kai Logon Se Hota Hai... Magar...
Koi Pyar Se Nibhata Hai.. To...
Koi Nafrat Se Nibhata Hai



" EHSAAS "

Sabko Hota Hai... Magar...
Koi Mehsoos Karta Hai... To...
Koi Samajh Nahi Paata...


" ZINDAGI "

Sabhi Jeete Hai... Magar...
Koi Sab Kuch Paane K Baad Bhi Dukhi Rehte Hai... To...
Koi Lutake Khush Rehte Hai

बात कम कीजे जहानत को

बात कम कीजे जहानत को छिपाते रहिये 
अजनबी शहर है ये , दोस्त बनाते रहिये 

दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता 
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिये 

ये तो चेहरे की शबाहत हुई तस्वीर नहीं 
इस पे कुछ रंग अभी और चढाते रहिये 

गम है आवारा अकेले में भटक जाता है 
जिस जगह रहिये वहाँ मिलते मिलाते रहिये 

कोई आवाज तो जंगल में दिखाए रस्ता
अपने घर के दरो दीवार सजाते रहिये ----------- निदा फाजली 

जहानत -- प्रतिभा , शबाहत --सदृशता , दरो दीवार ---- दरवाजा और दीवार

मन की अभिलाषा क्रंदन करती

मन की अभिलाषा क्रंदन करती 
निज मन को ही दुःख से भारती
उजली होती काश ये धरती
कोई तो मन को समझाए

चलो आशा दीप जलाएं !!


तम हटता होता है सबेरा
हर्षित होता है मन मेरा
एक दिया लाखो अँधेरा
पल में अंधियारे को भगाए

चलो आशा दीप जलाएं !!!


मंद करुण तल यूँ जल जल के
नीर नेत्र से क्षण क्षण छलके
मन का प्रेम मन में छुपाये

चलो आशा दीप जलाएं !!!


कुछ मन में उनके कुछ था मेरे
अनजाने से क्यों बादल घेरे
क्यों हम न उनके वो न मेरे
खुद से पूछे खुद को ही बताएं

चलो आशा दीप जलायें !!!

----सुजीत सिंह ([email protected])

जिन्दा रहना है तो, हर

जिन्दा रहना है तो, हर साँस दुश्मन से न मांग !
रखवाला खुदा है, तो रहमत महालात से न मांग !
ज़िन्दगी अगर भीख है, तो न मिलना बेहतर !
और अगर हक़ है, तो इतनी सराफत से न मांग !!!
---सुजीत सिंह

Ek masum sa chehra, 2 jheel

Ek masum sa chehra,
2 jheel si ankhe,
Kuchh mithi mithi baate,
Ek nazuk ada,
Kuchh masti kuchh maza,
Thodi si shrarat,
Bahut sari mohabbat,
Ek bholi si muskan,
Ooncha udne ka armaan,
Sabse alag sabse juda,
Jiski hai pyari har ek ada.......
wo Sweet Girl ho $TUM$
I Think.............
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Sweet raho CADBURY ki Tarah;
Fresh raho CLOSEUP ki tarah;
BEAUTIFUL raho Fair&Lovely ki tarah;
Tension free raho CHILD ki tarah;
aur smart raho MERI TARAH ..

झूठ तो झूठ है अकेलापन अकेलापन

झूठ तो झूठ है अकेलापन
अकेलापन सुखद अहसास है
इससे कोफ्त नहीं होती
यह तो लोगों को
परखने का साधन है
मन को, अनुभवों को
विस्तार मिलता है
अकेलापन खुद को खुद से
सिखाता है प्यार करना
भीड़ में खड़ा व्यक्ति
भले ही भ्रम में रहे
पर सच यह है कि वह
खुद में भी अकेला है
कोई किसी के पास होने का
दम नहीं भर सकता
परछाइंर् तक साथ नहीं देती
अमावस की मानिंद
अंधेरे में खो जाती है
अकेलापन!
कई भ्रमों को तोड़ता है
खुद को खुद से जोड़ता है...

(Nature)प्रेम ही शिवम है''

आँखों से देखा दिल में

आँखों से देखा दिल में उत्तर कर नहीं देखा
कश्ती में मुसाफिर ने समुंदर नहीं देखा 
पत्थर समझा मुझे मेरे चाहने वालो ने 
में मोम हु किशी ने मुझे छूकर नहीं देखा

गर रख सको तो एक

गर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं ,
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया,
वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं.....
सबको प्यार देने की आदत है हमें,
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे,
कितना भी गहरा जख्म दे कोई,
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें...
इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं,
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं,
जो समझ न सके मुझे, उनके लिए "कौन"
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं,
आँख से देखोगे तो खुश पाओगे,
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं,,,,,
"अगर रख सको तो निशानी, खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं"....

कभी उसे भी मेरी याद

कभी उसे भी मेरी याद सताती होगी, 
अपनी आँखों में मेरे खवाब सजाती होगी,

वो जो हर वक़्त ख्यालों में बसी रहती है,
कभी तो मेरी भी सोचो में खो जाती होगी,

वो जिसकी राह में पलकें बिछी रहती है,
कभी मुझे भी अपने पास बुलाती होगी,

लबों पर रहती है वो हर पल हंसी बनकर,
तसवर से मेरे वो भी मुस्कुराती होगी,

वो जो शामिल है मेरे गीत मेरे नागमो में,
कभी तन्हाई में मुझको गुण गुनाती होगी,

जिसके लिए मेरा दिल बेकरार रहता है,
मेरे लिए अपना चैन भी गवंती होगी,

जिससे प्यार हर पल करना चाहूँ,
कभी इकरार तो वो भी करना चाहती होगी,

जिसके लिए मेरी हर रात है कटती करवट करवट,
कभी तो उसे भी नींद ना आती होगी,
जिसकी उल्फत की शमा से है मेरा दिल रोशन,

मेरी चाहत के वो भी दीप जलती होगी,
छोड़ कर चला जाऊंगा उसे एक दिन, 

मेरी जुदाई उसे भी युही रुलाती होगी..

भटक रही हूँ मैं सहारे

भटक रही हूँ मैं सहारे की तलाश में .......
नदी सी बह रही हूँ, किनारे की आस में........
खो रही हूँ अँधेरे में..........
रौशनी की तलाश में.......
खुद में ही उलझी हुई हूँ.
....... खुद की तलाश में............

युँ तो बहुत कुछ है

युँ तो बहुत कुछ है पास मेरे फिर भी कुछ कमी सी है
घिंरा हूँ चारो तरफ़ मुस्कुराते चेहरो से
फिर भी जिन्दगी में उजाले भरने वाली उस मुस्कुराहट की कमी सी है
दिख रही है पहचान ...पनी ओर उठते हर नज़र में
फिर भी दिल को छु लेने वालि उस निगाह की कमी सी है
गुँज़ता है हर दिन नये किस्सो, कोलाहल और ठहाको से
फिर भी कानो में गुनगुनाति उस खामोशी कि कमी सी है
बढ़ रहे है कदम मेरे पाने को नयी मन्ज़िलें
फिर भी इन हाथो से छुट चुके उन नरम हाथो की कमी सी है.
"हमेशा हँसते रहो, हँसना ज़िन्दगी की जरूरत है,

क्या लिखूँ : कुछ जीत

क्या लिखूँ : कुछ जीत लिखू या हार लिखूँ

या दिल का सारा प्यार लिखूँ ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰

कुछ ...पनो के ज़ाज़बात लिखू या सापनो की सौगात लिखूँ ॰॰॰॰॰॰

मै खिलता सुरज आज लिखू या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँ ॰॰॰॰॰॰

वो डूबते सुरज को देखूँ या उगते फूल की सान्स लिखूँ

वो पल मे बीते साल लिखू या सादियो लम्बी रात लिखूँ

मै तुमको ...पने पास लिखू या दूरी का ऐहसास लिखूँ

मै ...न्धे के दिन मै झाँकू या आँन्खो की मै रात लिखूँ

मीरा की पायल को सुन लुँ या गौतम की मुस्कान लिखूँ

बचपन मे बच्चौ से खेलूँ या जीवन की ढलती शाम लिखूँ

सागर सा गहरा हो जाॐ या ...म्बर का विस्तार लिखूँ

वो पहली -पाहली प्यास लिखूँ या निश्छल पहला प्यार लिखूँ

सावन कि बारिश मेँ भीगूँ या आन्खो की मै बरसात लिखूँ

गीता का ......जुन हो जाॐ या लकां रावन राम लिखूँ॰॰॰॰॰

मै हिन्दू मुस्लिम हो जाॐ या बेबस ईन्सान लिखूँ॰॰॰॰॰

मै ऎक ही मजहब को जी लुँ ॰॰॰या मजहब की आन्खे चार लिखूँ॰॰॰

कुछ जीत लिखू या हार लिखूँ , या दिल का सारा प्यार लिखूँ.......

अगर रख सको तो एक

अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं,
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया,
वो एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं,
सबको प्यार देने की आदत है हमें,
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे,
कितना भी गहरा जख्म दे कोई,
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें,
इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं,
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं,
जो समझ न सके मुझे उनके लिए "कौन",
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं,
आँख से देखोगे तो खुश पाओगे,
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं,

नारी नारी कितनी महान हो तुम मुखडे

नारी


नारी कितनी महान हो तुम
मुखडे की मुसकान हो तुम
बादल की परतों में चंदा
नारी जगत की शान हो तुम
उजडे बाग-बगीचों में तुम
धडकन की महारानी हो तुम
अपार सागर महा समुन्दर
शक्ति की पटरानी हो तुम
हुमायूँ को राखी-डोरा भेजा
भाई-बहन की शान हो तुम
नाविक हो नारी भी हो तुम 
सागर का बेडा पार करो तुम
रूण्ड-मुण्ड की माला पहिने
चन्डी हो रणचण्डी हो तुम 
स्रष्टा हो रुष्टा भी हो तुम 
अन्नपूर्णा महारानी हो तुम
ताण्डव नृत्य कियो शिवजी ने
सृष्टि की महारानी हो तुम
शरद ऋतु में रास रचायो
शामा हो पटरानी हो तुम 
शमा बनी शबनम की मीरा
कुदरत की महारानी हो तुम
नारी कितनी महान हो तुम

(डॉ. नर्वदाशंकर रणा)
महालक्ष्मी चौक, बाँसवाडा, राजस्थान

काया कोई काम न आवेगी काया मद

काया


कोई काम न आवेगी काया
मद में उसको जान न पावे
विधि लेख मिटे नहीं माया में
जीवन की घडयां बित जावें
कोई काम न आवेगी काया
पंछी उडता चलती काया में
मैं का भान नहीं आवे
यह सागर अंत नहीं उसका
मुनिराज भी पार नहीं पावे
कोई काम नहीं आवेगी काया
चलता-फिरता मैं भूल जाऊँ
मन काम में मेरा लग जावे
रोना-पिटना पिंजरा खाली
जब शेर यहां से भग जावे
कोई काम न आवेगी काया
सुनते रहने की रीत यहां पर
ध्यान नहीं जो सो जावें
सोने वालों की बात नहीं
जगने वाले कुछ पा जावें
कोई काम न आवेगी काया


(डॉ. नर्वदाशंकर रणा)
महालक्ष्मी चौक, बाँसवाडा, राजस्थान

जाऊँ तो जाऊँ कहाँ.... जाऊँ तो

जाऊँ तो जाऊँ कहाँ....


जाऊँ तो जाऊँ कहाँ
दिल के अरमान लिये
जली ये आग सनम और सितम की शान लिये
जाऊँ तो जाऊँ कहाँ.....।

बना महमान भला, भली तकदीर मेरी
पडा हूँ देख रहा आग पे तसवीर तेरी
जुदाई हो गई सपनों में अहसान लिये
जाऊँ तो जाऊँ कहाँ......।

बँधा हूँ इस कदर कि हाथ में कडयां भी नहीं
मिली जो खाक में माटी की लडयां भी नहीं
नजर में था भी नहीं मौत का पैगाम लिये
जली ये आग सनम की सितम की शान लिये
जाऊँ तो जाऊँ कहाँ........।

- डॉ. नर्मदाशंकर रणा

UNHE KISSA-E-GAM SUNATE SUNATE KATI RAATEIN

UNHE KISSA-E-GAM SUNATE SUNATE
KATI RAATEIN AANSU BAHATE BAHATE

KAHI BUJH NA JAYE CHIRAAG-E-TAMANNA
CHIRAAG-E-MOHABBAT JALAATE JALAATE

KISSI KO KHABAR HI NAHI LUT GAYAA HU
MOHABBAT KI DUNIYA BASATE BASAATE

KEHDE KOI UNSE.....
WO KHUD BAAZ AAYE APNE SITAM SE
HUM THAK GAYE HAIN MANATE MANATE.

यह साए हैं , दुनिया

यह साए हैं , दुनिया की परछाइयों की 
भरी भीड़ में , खाली तनहाइयों की 

यहाँ कोई साहिल - सहारा नहीं है 
कहीं डूबने को किनारा नहीं है 

कई चाँद उठ कर जलाए - बुझाये 
बहुत हमने चाहा ज़रा नींद आये 

यहाँ सारे चेहरे हैं मांगे - हुए - से 
निगाहूँ में आंसू भी टाँगे - हुए से 

बड़ी नीची राहें हैं उचाइयों की 
ये साए हैं ,दुनिया है परछाइयों है 
भरी भीड़ में , खाली तनहाइयों है

सोच पर विजय कैसे मिले

सोच पर विजय कैसे मिले ? 


सोच पर विजय कैसे मिले ?
बहुत सोचा मैने फिर पाया कि हासिल कुछ नहीं आया,
फिर सोचा कि मैने इतना क्यों सोचा आखिर क्या पाने को,
लगा हाथ निर्णय मतलबी बन जाने को,
फिर सोचा अब नहीं सोचना है,
जीवन तो जीवन है इसे सफल बनाना है,
बस निकल पड़े बरस दर बरस,
यूं ही इस सोच में, आज मैं फिर सोच रहा हूं,
कि आखिर क्यों सोच रहा हूं ?
क्या सोच रहा हूं ?
किस लिये सोच रहा हूं?
उत्तर फिर भी यक्ष प्रश्न बना खड़ा पाता हूं, 
जीवन सफल बनाने को, 
आज भी सोचना मैं बंद नहीं कर पाता,
हर बार एक यक्ष प्रश्न 
इस उत्तर के साथ खड़ा पाता हूं,
कि बस अगले कदम पर ही तो मंजिल है
उसके बाद सोचने कि क्या जरुरत है ?
लेकिन कदम दर कदम चलने के बाद,
सिर्फ तृष्णा ही पाता हूं,
सोचना बंद करना तो दूर,
यह सोचने में लग जाता हूं,
कि आखिर इस सोचने,
पर कैसे विजय पा सकता हूं ?

ahal-e-daval main dhoom thi roz-e-saeed

ahal-e-daval main dhoom thi roz-e-saeed ki
muflis ky dil main thi na kiran bhi ummid ki
itny main aur charkh(Sky) ny matti palid ki
bachchy ny muskura ke khabar di jo eid ki
fart-e-mihan se nabz ki raftar ruk gai
MAA-BAAP ki nigah uthi aur jhuk gai
ankhain jhukin ki dast-e-tihi par nazar gai
bachchy ky val-valon ki dilon tak khabar gai
zulf-e-sabat ghum ki hawa sy bikhar gai
barchhi si ek dil se jigar tak utar gai
donon hujuum-e-gam se ham-agosh ho gaye
ik duusare ko dekh ke khamosh ho gaye



dast-e-tihi = empty hands;
val-vale = enthusiasm
sabat = patience;
barchhi = spear
fart-e-mihan = wave of sorrow;
nabz = pulse
ahal-e-daval = rich people;
roz-e-saeed = festive day
muflis = poor/poverty/stricken;
charkh = sky (referring to god)
hujuum = crowd;
ham-agosh = embraced

Benaam Sa Ye Dard,Thehar Q

Benaam Sa Ye Dard,Thehar Q Nahi Jata!
Jo Beet Gaya Hai,Woh Guzar Kyon Nahi Jata!!

Sab Kuch To Hai,Kya Dhundti Rehti Hai Nigaahein!
Kya Baat Hai,Mai Waqt Pe Ghar Kyon Nahi Jata!!

Woh Ek Hi Chehra To,Nahi Sare Jahan Mein!
Jo Door Hai Woh, Dil Se Utar Kyon Nahi Jata!!

Main Apni Hi Uljhi Hoi,Raho Ka Tamasha!
Jate Hain Jidhar Sab,Main Udhar Kyon Nahi Jata!!

Woh Naam Jo Na Jane Kab Se, Na Chehra Na Badan Hai!
Woh Khawaab Agar Hai,To Bikhar Kyo Nahi Jata!!

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