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How can I make smile on you face
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How can I make smile on you face


Eyes tell the truth
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Eyes tell the truth


आम आदमियों की फितरत समझाती एक प्यारी सी कविता

*कहाँ पर बोलना है*
*और कहाँ पर बोल जाते हैं।*
*जहाँ खामोश रहना है*
*वहाँ मुँह खोल जाते हैं।।*

*कटा जब शीश सैनिक का*
*तो हम खामोश रहते हैं।*
*कटा एक सीन पिक्चर का*
*तो सारे बोल जाते हैं।।* 

*नयी नस्लों के ये बच्चे*
*जमाने भर की सुनते हैं।*
*मगर माँ बाप कुछ बोले*
*तो बच्चे बोल जाते हैं।।*

*बहुत ऊँची दुकानों में*
*कटाते जेब सब ...पनी।*
*मगर मज़दूर माँगेगा*
*तो सिक्के बोल जाते हैं।।*

*...गर मखमल करे गलती*
*तो कोई कुछ नहीँ कहता।*
*फटी चादर की गलती हो*
*तो सारे बोल जाते हैं।।*

*हवाओं की तबाही को*
*सभी चुपचाप सहते हैं।*
*च़रागों से हुई गलती*
*तो सारे बोल जाते हैं।।*

*बनाते फिरते हैं रिश्ते*
*जमाने भर से ...क्सर।*
*मगर जब घर में हो जरूरत*
*तो रिश्ते भूल जाते हैं।।*
 
*कहाँ पर बोलना है*
*और कहाँ पर बोल जाते हैं*
*जहाँ खामोश रहना है*
*वहाँ मुँह खोल जाते हैं।।*


       🙏🙏🙏🙏🙏


जीवन तभी कष्टमय होता है, जब वस्तुओं की इच्छा करतें हैं !
और मृत्यु तभी कष्टमय होती है, जब जीनें की इच्छा करतें हैं !!

जिंदगी कभी तानों में कटेगी कभी तारीफों में

कभी तानों में कटेगी
कभी तारीफों में
ये जिंदगी है यारों
पल पल घटेगी

पाने को कुछ नहीं
ले जाने को कुछ नहीं
फिर भी क्यों चिंता करते हो
इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी
ये जिंदगी है यारों
पल पल घटेगी
💞
बार बार रफू 
करता रहता हूँ 
जिन्दगी की जेब.

कम्बखत फिर भी 
निकल जाते हैं 
खुशियों के कुछ लम्हें.
💞
ज़िन्दगी में 
सारा झगड़ा ही 
ख़्वाहिशों का है.

ना तो किसी को गम चाहिए 
ना ही किसी को कम चाहिए.
💞
खटखटाते रहिए दरवाजा
एक दूसरे के मन का,
मुलाकातें ना सही
आहटें आती रहनी चाहिए.

उड़ जाएंगे एक दिन 
तस्वीर से रंगों की तरह,
हम वक्त की टहनी पर 
बेठे हैं परिंदों की तरह.
💞
पता नहीं क्यों लोग
रिश्ते छोड़ देते हैं
लेकिन जिद नहीं.
💞
बोली बता देती है 
इंसान कैसा है.
बहस बता देती है 
ज्ञान कैसा है.
घमण्ड बता देता है 
कितना पैसा है.
संस्कार बता देते है 
परिवार कैसा है. 
💞
ना राज़ है.. ज़िन्दगी
ना नाराज़ है.. ज़िन्दगी,
बस जो है
वो आज है.. ज़िन्दगी.
💞
मिलने को तो हर शख्स 
हमसे बड़ा एहतराम से मिला,
पर जो भी मिला 
किसी ना किसी काम से मिला.
💞
जीवन की किताबों पर,
बेशक नया कवर चढ़ाइये.
पर बिखरे पन्नों को,
पहले प्यार से चिपकाइये.
💞
जो मिला उसमें
ही खुश रहता हूँ,
मेरी उंगलियां
ही मुझे सिखाती हैं
दुनियाँ में बराबर कोई नहीं है.
💞
लफ़्ज़ों के इत्तेफाक़ में 
यूँ बदलाव करके देख,
तू देख कर न मुस्कुरा
बस मुस्कुरा के देख.



ये शिकायतों का दौर देखता हूँ,
तो थम सा जाता हूँ. . .
लगता है उम्र कम है और इम्तिहान बहुत है. . . .!!

जात सिर्फ खुदा दी उच्ची

वेख फरीदा मिट्टी खुली ( कबर )
मिट्टी उत्ते मिट्टी डुली ( मृत देह )
मिट्टी हस्से मिट्टी रोवे ( मनुष्य )
...ंत मिट्टी दा मिट्टी होवे ( शरीर )
न कर बंदेया मेरी मेरी
न एह तेरी न एह मेरी
चार दिनां दा मेला दुनिया
फेर मिट्टी दी बन गई ढेरी
न कर एत्थे हेरा फेरी
मिट्टी नाल न धोखा कर तू
तू वी मिट्टी ओ वी मिट्टी
जात पात दी गल्ल न कर तू
जात वी मिट्टी पात वी मिट्टी
जात सिर्फ खुदा दी उच्ची
बाकी सब कुछ मिट्टी🙏

A Kalam by Baba Farid on equality in each every human

भेजे को सिगनल मिलता नहीं

बिसर गया है सब कुछ, मेरी लाईफ में !
कुछ यादें बची हैं, इस दिल के पेन ड्राईव में !!
:
जिस दिन मैंने दुनिया में, लॉग इन किया !
सारा मोहल्ला खुशियों से रंगीन किया !!
:
स्कूल में मेरी, होती ...क्सर पिटायी थी !
मैं 2G था, और मैडम वाईफाई थी !!
:
उस पर मेरा, सॉफ्टवेयर बडा पुराना था !
ट्यूब लाईट था मैं, जब CFL का जमाना था !!
:
गणित में तो, मैं बचपन से ही फ़्लॉप था !
भेजे का पासवर्ड, बड़े दिनों तक लॉक था !!
:
कितना भी मारो, भेजे को सिगनल मिलता नहीं !
बिन सिगनल, जिंदगी का नेटवर्क चलता नहीं !!
:
जब जब स्कूल जाने में, मैं लेट हुआ !
प्रिंसपल की डाँट से, सॉफ़्टवेयर ...पडेट हुआ !!
:
हाईस्कूल में, ईश्क का वायरस घुस बैठा !
भेजे में सुरक्षित, सारा डाटा चूस बैठा !!
:
नजरों से नजरें टकरायी, 10th क्लास में !
मैसेज आया, मेरे दिल के इनबॉक्स में !!
:
जब जब मैंने, आगे बढकर पोक किया !
धीरे से उसने, नजरें झुकाकर रोक लिया !!
:
कॉलेज में देखा किसी गैर के साथ, तो मन बैठा !
ईश्क का वायरस, एंटीवायरस बन बैठा !!
:
वो रियल थी, लेकिन फ़ेक आईडी सी लगने लगी !
बातों से ...पनी, मेरे यारों को भी ठगने लगी !!
:
आयी वो वापस, दिल पे मेरे नॉक किया !
लेकिन फ़िर मैंने, खुद ही उसको ब्लॉक किया !!
:
मेरे जीवन में, ...ब प्यार के लिए स्पेस नहीं !
मैं 'मीत' हूँ पगली, मजनू का ...वशेष नहीं !!
:
कॉलेज से निकला, दुनियादारी सीखने लगा !
बना मैं शायर, देशप्रेम पर लिखने लगा !!
:
जब दिल चाहे, तसवीर नयी बनाता हूँ !
आदमी को उसका, ...सली चेहरा दिखलाता हूँ !!
:
डरता है दिल, जिंदगी मेरी ना वेस्ट हो !
जो कुछ लिखूँ, सदियों तक कॉपी पेस्ट हो !!
:
ख्वाहिश है, मेरे गीत जहाँ में लाउड हों !
इस 'ज़िंदगी' का क्या है, जाने कब लॉग आउट
हो !

बे मौसम बरसात हुई है

बे मौसम बरसात हुई है,
आज तो सारी रात हुई है..
कुछ को यह रंगीन लगी है,
कुछ के लिये संगीन बनी है.
टूट गये सपने किसान के,
रोता नीचे आसमान के..
मानसून की मार पड़ी थी,
एक न तब बौछार पड़ी थी..
खून पसीने से सींचा था,
...पने सपनों को बेचा था..
मुश्किल से जो धान पके थे,
वो मिट्टी के मोल बिके थे..
...ब गेहूँ पर झूम रहा था,
उन पौधों को चूम रहा था..
आलू सरसों पर इठलाता,
...पने बच्चों को समझाता..
ले आना तुम फीस का पर्चा,
कॉपी और किताब का खर्चा..
नये सूट तुम सिलवा लेना,
साइकिल नई निकलवा लेना..
सपनों पर आघात हो गया,

फसल जमी पर सुला दिया है,
फिर किसान को रुला दिया है..
ज्यों ज्यों पानी बरस रहा है,
यह गरीब भी तरस रहा है..
क्या किसान इन्सान नहीं है
सुनता क्यों भगवान् नहीं हे

गालियाँ क्या देते हो

रंग रलियों को छोड़,
गरीब की गलियों में आकर तो देखो!
बेमानी की रोटी छोड़,
खून पसीने की रोटी खा कर तो देखो!!
लाखो को आग लगाते,
इक दिन आग में काम करके तो देखो!
तिलक चंदन लगाते,
इक बार माटी का तिलक लगा कर तो देखो!!
तुम क्या निकालोगे हल,
इक बार भूमिपुत्र हलधारी बन तो देखो!
खुशहाल होगा भारत,
किसानो के ह्रदय में बस कर तो देखो!!
गालियाँ क्या देते हो,
इक बार "सरफ़रोसी की तमन्ना"गा कर देखो!
लोगो को क्या नचाते,
इक बार तांडव मचा कर के तो देखो!!
बेमान नेता क्यूँ हो,
इक बार नेता सुभाष बन के तो देखो!
जहां सिर झुकायेगा,
इक बार फिर से शंखनाद कर तो देखो!!

जीवन की चादर में

इस जीवन की चादर में,
सांसों के ताने बाने हैं,
दुख की थोड़ी सी सलवट है,
सुख के कुछ फूल सुहाने हैं.

क्यों सोचे आगे क्या होगा,
...ब कल के कौन ठिकाने हैं,
ऊपर बैठा वो बाजीगर ,
जाने क्या मन में ठाने है.

चाहे जितना भी जतन करे,
भरने का दामन तारों से,
झोली में वो ही आएँगे,
जो तेरे नाम के दाने है.
-------------------------------------------


आपको कोई ...च्छा 
इंजीनियर मिले
तो बताना......

मुझे इंसान से इंसान 
को जोड़ने वाला पुल
बनाना है....

बहते आंसुओ को रोकने 
वाला बांध बनाना है....

और

सच्चे संबंधो में पड़ती 
दरारो को भरवाना है.

I said: what about my

I said: what about my eyes ?
God said: Keep them on your destination.
I said: What about my passion ?
God said: Keep it burning.
I said: What about my heart ?
God said: Tell me what you hold inside it ?
I said: Pain and sorrow.
God said: Stay with it. The wound is the place where the Light enters you.


Writer - Rajnikant Vyas, Bikaner

इस जीवन की चादर में

A Poem on Life, Like, Dislike

ज़िन्दगी जीने के दो तरीके होते है! पहला:
जो पसंद है उसे हासिल करना सीख लो.! 
दूसरा: जो हासिल है उसे पसंद करना सीख लो.! 
जिंदगी जीना आसान नहीं होता; 
बिना संघर्ष कोई महान नहीं होता; 
जब तक न पड़े हथोड़े की चोट;
 पत्थर भी भगवान नहीं होता। 
जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है; 
कभी हंसती है तो कभी रुलाती है; 
पर जो हर हाल में खुश रहते हैं; 
जिंदगी उनके आगे सर झुकाती है। 
चेहरे की हंसी से हर गम चुराओ; 
बहुत कुछ बोलो पर कुछ ना छुपाओ; 
खुद ना रूठो कभी पर सबको मनाओ; 
राज़ है ये जिंदगी का बस जीते चले जाओ।
------------------------------------------------

इस जीवन की चादर में,
सांसों के ताने बाने हैं,
दुख की थोड़ी सी सलवट है,
सुख के कुछ फूल सुहाने हैं.
क्यों सोचे आगे क्या होगा,
...ब कल के कौन ठिकाने हैं,
ऊपर बैठा वो बाजीगर ,
जाने क्या मन में ठाने है.
चाहे जितना भी जतन करे,
भरने का दामन तारों से,
झोली में वो ही आएँगे,
जो तेरे नाम के दाने है.

Ae zindagi.. tu hi bata

Ae zindagi.. tu hi bata ,
paya h kya bas khoya h yahan...
har pal mein yuhi 
roti rahi hasna h kya jaanu mein naa...
hr waqt mein khoe rahi, 
or waqt yu jata raha...

दर्द कैसा भी हो आंख

दर्द कैसा भी हो आंख नम न करो
रात काली सही कोई गम न करो
एक सितारा बनो जगमगाते रहो
ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो
बांटनी है अगर बाँट लो हर ख़ुशी
गम न ज़ाहिर करो तुम किसी पर कभी
दिल कि गहराई में गम छुपाते रहो
ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो
अश्क अनमोल है खो न देना कहीं
इनकी हर बूँद है मोतियों से हसीं
इनको हर आंख से तुम चुराते रहो
ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो
फासले कम करो दिल मिलाते रहो
ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो..

Azmat-e-zindagi ko bech diya ham ne

Azmat-e-zindagi ko bech diya
ham ne apni Khushi ko bech diya

chashm-e-saaqi ke ik ishaare pe
umr ki tishnagi ko bech diya

rind jaam-o-subuu pe hanste hain
shaikh ne bandagi ko bech diya

rah_guzaaron pe lut gai raadhaa
shaam ne baansuri ko bech diya

jagmagaate hain vahashaton ke dayaar
aql ne aadami ko bech diyaa

lab-o-rukhsaar ke ivaz hum ne
sitvat-e-Khusravii ko bech diya

ishq beharoopiyaa hai ai 'Sagar'
aap ne saadagi ko bech diya

हमने भी ज़माने के कई

हमने भी ज़माने के कई रंग देखे है
कभी धूप, कभी छाव, कभी बारिशों के संग देखे है

जैसे जैसे मौसम बदला लोगों के बदलते रंग देखे है

ये उन दिनों की बात है जब हम मायूस हो जाया करते थे
और अपनी मायूसियत का गीत लोगों को सुनाया करते थे

और कभी कभार तो ज़ज्बात मैं आकर आँसू भी बहाया करते थे
और लोग अक्सर हमारे आसुओं को देखकर हमारी हँसी उड़ाया करते थे

"अचानक ज़िन्दगी ने एक नया मोड़ लिया
और हमने अपनी परेशानियों को बताना ही छोड़ दिया"

अब तो दूसरों की जिंदगी मैं भी उम्मीद का बीज बो देते है
और खुद को कभी अगर रोना भी पड़े तो हस्ते हस्ते रो देते है

" Saari Umr mein Mar Mar

" Saari Umr mein
Mar Mar ke jee liye
Ek pal to ab mujko
Jeene Do Jeene do


Give me some Sunshine
give me some rain
Give me another chance
wana grow up once again


Kandhon ko kitabon
Ke bojh ne jhukaya
Rishvat dena to khud
Papa ne sikhya
99% marks laaoge to
gaadi varna chhadi

Likh likh pada
hatheli par
Alpha beta gamma ka chaala
Concentrated H2so4
Ne Poora Poora bachpan jala dala

Bachpan to gaya
Jawani bhi gayi
Ek pal To ab mujko
Jeen Do jeene do"

AHSAS AAJ MUJHSE MARI TANHAI

AHSAS 


AAJ MUJHSE MARI TANHAI KEHNE LAGI
KI YE KAISA EHSAS HAI
CHALAK PADE ANKHO SE AASU
JAB KI HAR KHUSHI MERE PASS HAI

KABHI-KABHI MAN BECHAN HO JATA HAI
JAISE ANDAR SE KUCH NIKAL GAYA HO
KITNA BHI ROKU IS DARD KO
PAR LAGTA HAI AASU PIGHAL GAYA HO


KITNA DARD HAI MARI AWAZ ME
YE NAHI KOI JANTA
HAR BAAT CHAHE SACHI HO
PAR NAHI KOI MANTA

AAJ FIR SE US DARD NE MUJHEY PUKARA HAI
OR VO DARD PEHLE SE BHI JYADA DARDNAK HAI
YE VAHAM HAI YA KUCH OR
JO BHI HAI BAHUT KHATRNAK HAI.

PAYAL VERMA



_________________
ALWAYS REMEMBER ME BY MY POEMS.
PAYAL VERMA

SAMJHOTA MERE AASU MUJHSE BEWAFAI

SAMJHOTA 



MERE AASU MUJHSE BEWAFAI KARTE HAI
JAB MAIN CHAHTI HU KI VO MERE DARD KO HALKA KARE
AUR BAHAR NIKLE
TO VO BAHAR AANE ME AANA-KAANI KARTE HAI
MERE AASU MUJHSE BEWAFAI KARTE HAI


DUNIYA KI NAZAR ME MAIN MUSKURATI HU
VO SOCHTE HAI MUJHEY KOI GUM NAHI
ANDAR SE GHUT-GHUT KAR JI RAHI HU
YE KOI MARNE SE KAM NAHI

NARAZ KHUDA KI DI HUE ZINDGI SE NAHI HU
SHAYAD ME APNE AAP ME NAHI SAHI HU
SAB KUCH MILA HAI MUJHEY
FIR BHI ME KHUSH NAHI REH PATI HU
KHUD TO JHULSTI HU IS AAG ME
DUSRO KO BHI DUKHI KAR JATI HU

AB ME AASUO KE SAATH SAMJHOTA KAR RAHI HU
UNHE ANDAR REHNE KI IZAZAT DE DI HAI
AUR BAHAR ME MUSKURANE KI KOSHISH KAR RAHI HU.

PAYAL VERMA



_________________
ALWAYS REMEMBER ME BY MY POEMS.
PAYAL VERMA

अब घर से निकलना हो

अब घर से निकलना हो गया है मुश्किल,
जाने किस मोड़ पर खडी है मौत......
दस्तक सी देती रहती है हर वक्त दरवाजे पर,
पलकों के गिरने उठने की जुम्बिश भी सिहरा देती है....
धड़कने बजती है कानो में हथगोलों की तरह,
हलकी आहटें भी थर्राती है जिगर ......
लेकिन जिन्दगी है की रुकने का नाम ही नहीं लेती,
दहशतों के बाज़ार में करते है सांसो का सौदा....
टूटती है, पर बिखरती नहीं हर ठोकर पे संभलती है,
पर कब तक ??? कहाँ तक???????
क्यूंकि अब घर से निकलना हो गया मुश्किल
जाने कौन से मोड़ पे खडी है मौत........
डर से जकड़ी है हवा,दूर तक गूंजते है सन्नाटे...
खुदा के हाथ से छीन कर मौत का कारोबार,
खुद ही खुदा बन बैठे है लोग....
मुखोटों के तिल्लिस्म में असली नकली कौन पहचाने
अपने बेगानों की पहचान में ख़त्म हो रही है जिन्दगी ...
अब लोग दूजों की ख़ुशी में ही मुस्कुरा लेते है,
घर जले जो किसी का तो,दिवाली मना लेते है....
खून से दूजों के खेल लेते है होली,
उडा कर नया कफन किसी को वो ईद मना लेते है........
क्यूंकि घेर से निकलना हो गया है मुशकिल
जाने कौन से मोड़ पर कड़ी है मौत....

मैं दो कदम चलता

 मैं दो कदम चलता और एक पल को रुकता मगर...........
 इस एक पल जिन्दगी मुझसे चार कदम आगे बढ जाती ।
 मैं फिर दो कदम चलता और एक पल को रुकता और....
 जिन्दगी फिर मुझसे चार कदम आगे बढ जाती ।
 युँ ही जिन्दगी को जीतता देख मैं मुस्कुराता और....
 जिन्दगी मेरी मुस्कुराहट पर हैंरान होती ।
 ये सिलसिला यहीं चलता रहता.....
 फिर एक दिन मुझे हंसता देख एक सितारे ने पुछा..........
 " तुम हार कर भी मुस्कुराते हो ! क्या तुम्हें दुख नहीं होता हार का ? "
 तब मैंनें कहा............
 मुझे पता हैं एक ऐसी सरहद आयेगी जहाँ से आगे
 जिन्दगी चार कदम तो क्या एक कदम भी आगे ना बढ पायेगी,
 तब जिन्दगी मेरा इन्तज़ार करेगी और मैं.....
 तब भी युँ ही चलता रुकता अपनी रफ्तार से अपनी धुन मैं वहाँ पहुँगा....
 एक पल रुक कर, जिन्दगी को देख कर मुस्कुराउगा..........
 बीते सफर को एक नज़र देख अपने कदम फिर बढाँउगा।
 ठीक उसी पल मैं जिन्दगी से जीत जाउगा.......
 मैं अपनी हार पर भी मुस्कुराता था और अपनी जीत पर भी...
 मगर जिन्दगी अपनी जीत पर भी ना मुस्कुरा पाई थी और अपनी हार पर

**सुबह से लेकर रात तक..

**सुबह से लेकर रात तक.. भागती रहती है ये जिंदगी ..
कभी इस खबर.. कभी उस खबर.. मै .. बेखबर सा होकर घूमता रहता हूँ..
बदबूदार लाशें... नालियों में सड़ती नवजात बेटियाँ... तो बेटो के जन्मोत्सव..
चौराहे पर एक कट चाय पीकर... मई फिर भी कविता लिख लेता हूँ...
** निर्मोही सा ... अब ये मन .. नहीं पसीजता किसी घटना से.....
मोहल्ले के कुत्ते की मौत पर.... मै कभी बहुत रोया था.... 
अब नर संहारो से भी कोई सरोकार नहीं ....
फिर भी देर रात घर लौटते वक़्त..मै मुंडेर पर ..चिडियों का पानी भर लेता हूँ...
***परिभाषा काल की मुझे नहीं मालुम.. जाने कब क्या हो...
कोई मिला तो हंस लिए...न मिला तो चल दिए...
पदचाप अपने ...निशब्द भी मिले... तो युही कुछ गुनगुना लिया...
मै कैमरा अपना पैक करके ..छोटे से कमरे का .. झाडू-पोंचा कर लेता हूँ... 
षडयंत्र..राजनीती.. विरोध ..प्रदर्शन... जीवन के अब सामान्य पहलु से हो चले ...
गोपाल..बंटी...गोलू...आबिद की...याद बहुत आती है..खेतो की मिट्टी में गुजरा था बचपन..
अब धमाको में उड़े.. बच्चो का खून...
अपनी खबर देखते-देखते... मै अपने जूतों से चुपचाप साफ कर लेता

आज एक बार सबसे मुस्करा

आज एक बार सबसे मुस्करा के बात करो
बिताये हुये पलों को साथ साथ याद करो
क्या पता कल चेहरे को मुस्कुराना
और दिमाग को पुराने पल याद हो ना हो

आज एक बार फ़िर पुरानी बातो मे खो जाओ
आज एक बार फ़िर पुरानी यादो मे डूब जाओ
क्या पता कल ये बाते
और ये यादें हो ना हो

आज एक बार मन्दिर हो आओ
पुजा कर के प्रसाद भी चढाओ
क्या पता कल के कलयुग मे
भगवान पर लोगों की श्रद्धा हो ना हो

बारीश मे आज खुब भीगो
झुम झुम के बचपन की तरह नाचो
क्या पता बीते हुये बचपन की तरह
कल ये बारीश भी हो ना हो

आज हर काम खूब दिल लगा कर करो
उसे तय समय से पहले पुरा करो
क्या पता आज की तरह
कल बाजुओं मे ताकत हो ना हो

आज एक बार चैन की नीन्द सो जाओ
आज कोई अच्छा सा सपना भी देखो
क्या पता कल जिन्दगी मे चैन
और आखों मे कोई सपना हो ना हो

क्या पता
कल हो ना हो

जिन्दगी का पानी जब छू लिया

जिन्दगी का पानी
जब छू लिया जाता है

उठती हैं तरंगे
हर उभार में सच
और गर्त में 
भरम लिए

मैं सोचता हूँ
उस जिन्दगी को
जो ठहरे पानी की है

कहां रहता है
उसका सच
और किधर बहता है
भरम उसका

Zindagi hai choti , har

Zindagi hai choti , har pal mein khush raho...

Office me khush reho, ghar mein khush raho..

Aaj paneer nahi hai, dal mein hi khush raho, Aaj gym jane ka samay nahi, do kadam chal ke he khush raho..

Aaj Dosto ka sath nahi, TV dekh ke hi khush raho..

Ghar ja nahi sakte to phone kar ke hi khush raho...

Aaj koi naraaz hai, uske iss andaz mein bhi khush raho..

Jisse dekh nahi sakte uski awaz mein hi khush raho...

Jisse paa nahi sakte uske yaad mein he khush raho MBA karne ka socha tha, S/W mein he khush raho...

Laptop na mila to kya, Desktop mein hi khush raho..

bita hua kal ja chuka hai, usse meeti yaadein hai,unme he khush raho..

aane wale pal ka pata nahi..sapno mein he khush raho..

Haste haste ye pal bitaenge, aaj mein he khush raho Zindagi hai choti , har pal main khush raho.....

सभी शिकवे जमाने के दफ़न

सभी शिकवे जमाने के दफ़न कर लेना सीने में,
जिंदगी का मज़ा क्या है अरे मर - मर के जीने में
सभी शिकवे ज़माने के दफ़न कर लेना सीने में
जिन्दगी एक तोहफा है खुदा कि लाख नियामत है,
जरा पूंछो पत्थरों से जिन्हें ये ही शिक़ायत है
मुझे क्यूँ रब ने ना दी जिन्दगी क्या थी खता मेरी,
ठोकरें क्यूँ लिखीं तकदीर में ये तो बता मेरी
ना सरदी है ना गरमी है ना पतझड़ है ना बरसातें,
ना बूंदों कि ही रिमझिम का मज़ा सावन महीने में
सभी शिकवे ..................
ज़िन्दगी है कलश अमृत इसे भरपूर पिए जा,
हवा का एक झोंका बन मज़ा इसका तू लिए जा
जिन्दगी रंग से भर ले तितलियों के संग उड़कर,
कदम आगे बढाता चल कभी मत देखना मुड़कर
कभी मत कैद होना तू किसी कि चालबाजी में,
किसी के हार कंगन में किसी मोती नगीने में

सभी शिकवे जमाने के दफ़न कर लेना सीने में,
जिंदगी का मज़ा क्या है अरे मर - मर के जीने में

इस छोटी सी जिन्दगी के, गिले-शिकवे

इस छोटी सी जिन्दगी के,
गिले-शिकवे मिटाना चाहता हूँ,
सबको अपना कह सकूँ,
ऐसा ठिकाना चाहता हूँ,
टूटे तारों को जोड़ कर,
फिर आजमाना चाहता हूँ,
बिछुड़े जनों से स्नेह का,
मंदिर बनाना चाहता हूँ.
हर अन्धेरे घर मे फिर,
दीपक जलाना चाहता हूँ,
खुला आकाश मे हो घर मेरा,
नही आशियाना चाहता हूँ,
जो कुछ दिया खुदा ने,
दूना लौटाना चाहता हूँ,
जब तक रहे ये जिन्दगी,
खुशियाँ लुटाना चाहता हूँ

ज़िंदगी बस मौत का इंतज़ार

ज़िंदगी बस मौत का इंतज़ार है, और कुछ नहीं।
हर शख़्स हुस्न का बीमार है, और कुछ नहीं।।

तुमको सोचते-सोचते रात बूढ़ी हो गई,
आँखों को सुबह का इंतज़ार है, और कुछ नहीं।।

अब तो जंगलों में भी सुकूँ नहीं मिलता,
हर चीज़ पैसों में गिरफ़्तार है, और कुछ नहीं।।

यह न सोचो, कहाँ से आती हैं दिल्ली में इतनी कारें,
जिनकी हैं, उनकी एक दिन की पगार है, और कुछ नहीं।।

नेताओं की दुवा-सलामी से कभी खुश मत होना,
चुनाव-पूर्व के ये व्यवहार हैं, और कुछ नहीं।।

हमने अपनी जी ली, जितना खुद के हिस्से में था,
बाकी की साँसें दोस्तों की उधार हैं, और कुछ नहीं।।

तेरे न फ़ोन करने पर, जब भी हम शिकायत करें,
इसे गिला मत समझना, ये तो प्यार है, और कुछ नहीं।।

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